आर एस एस प्रमुख मोहन भागवत – लिंचिंग की घटनाएं भारत के यहां की नहीं है
आर एस एस प्रमुख मोहन भागवत ने आज विजयादशमी के मौके पर नागपुर में शस्त्र पूजन किया। इस मौके पर स्वयं सेवकों के पथ संचरण के बाद संघ के बैंड ने प्रस्तुति दी। आपको बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विजयदशमी को स्थापना दिवस के रूप में भी मनाता है। इस वार्षिक समारोह में एचसीएल के संस्थापक शिव नादर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। आपको बता दें कि 27 सितंबर सन् 1925 में आर एस एस की स्थापना हुई थी। संघ प्रमुख ने केंद्र सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का कार्य प्रशंसनीय है।
अयोध्या विवाद मध्यस्थता पर आरएसएस की पहली प्रतिक्रिया आई सामने
आर एस एस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक हिंसा की कुछ घटनाओं को लिंचिंग बनाकर भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संघ का नाम लिंचिंग से जोड़ा गया जबकि स्वयंसेवकों का ऐसी घटनाओं से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा ऐसी घटनाएं हमारे यहां कभी होती थीं। ऐसे शब्द कहां से आए? यह घटनाएं जहां की हैं और यह शब्द भी वहीं के हैं। यह घटनाएं छुटपुट समूह की है और शब्द भी वहीं से आए हैं। हमारे देश की परंपरा उदारता की है, भाईचारे के साथ मिलकर रहने की है।
आर एस एस प्रमुख मोहन भागवत ने की चन्द्रयान की सराहना

चंद्रयान पर उन्होंने कहा कि अब तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को किसी देश के वैज्ञानिकों ने छूने का साहस नहीं किया था। लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने अपने साहस का परिचय विश्व भर में दिया। उन्होंने कहा कि भले ही सफलता पूरी नहीं मिली लेकिन जितनी भी मिली वह विश्व के लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए काफी है। सारी दुनिया ने भारत की क्षमता का अभिनंदन किया।उन्होंने विश्व भर में आई आर्थिक मंदी पर कहा कि भारत सरकार उसके लिए पूर्ण प्रयास कर रही है। उस मंदी का असर भारत पर नहीं पड़ेगा।

