सबरीमाला मंदिर के फैसले पर चढ़ रहा है धीरे-धीरे सियासी रंग
सबरीमाला मंदिर जल्दी मासिक पूजा के लिए दोबारा से खुलेंगे और सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसले के चलते यह निर्णय लिया था कि सबरीमाला मंदिर में अब महिलाएं भी प्रवेश कर सकेंगी। गौरतलब है कि अभी भी इस पर विवाद धार्मिक संस्थानों में राजनीतिक परिवेशो में और गलियारों में गरमाया हुआ है ।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले के बाद भी त्रावणकोर देवस्वूम बोर्ड ने पंडलम पैलेस के प्रतिनिधि परिवार और अय्यप्पा सेवा संघ के नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया है । इधर भारतीय जनता पार्टी भी अपने विरोध प्रदर्शन में पूरी ताकत लगा रही है और अपने रैली को लेकर केरल सचिवालय पहुंच रही है । ऐसी स्थिति में हिंसा और टकराव रोकने के लिए केरल के लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार की आखिरी कोशिश के रूप में इन्हें देखा जा रहा है ।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ऐतिहासिक फैसले में 10 साल से लेकर 50 साल तक की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी है । सबरीमाला मंदिर से जुड़े आस्था के लोग और कुछ धार्मिक संस्थान और राजनीतिक परिवेश के लोग सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के चलते काफी नाराज चल रहे हैं और वह लगातार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं ।
इससे पहले तंत्री परिवार और पंडलम शाही परिवार के सदस्यों ने सीएम विजयन के साथ इसी मसले पर होने वाली मुलाकात से इनकार कर दिया था । उन्होंने ने आरोप लगाया था कि सरकार ने पहले से ही महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देने का मन बना लिया था । उन्होंने किसी भी धार्मिक संस्थानों से यहां हमसे इस विषय में कोई बातचीत नहीं की थी । यह मीटिंग केवल मृग मरीचिका जैसे भाव वाला है ।
टीडीपी के अध्यक्ष पद्म कुमार ने भी इस बारे में अपना बयान दिया है । उन्होंने बताया कि सबरीमाला मंदिर से हमारी आस्था जुड़ी हुई हैं । हम सालों से चली आ रही पुरानी परंपराओं और मूल्यों का समर्थन करते हैं । हम उन्हें किसी भी हालत में बदलने वाले नहीं हैं । हम हमेशा सबरीमाला के भक्तों के हित और मूल्यों की रक्षा करना चाहते हैं । उन्होंने आगे कहा कि सभी मुद्दों को सुलझाना जरूरी है क्योंकि बोर्ड नहीं चाहता कि सबरीमाला मंदिर एक राजनीतिक मुद्दा बन जाय ।

