राफेल मामले ने पकड़ी आग, कटघरे में मोदी सरकार
कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राफेल मामले को लेकर काफी गहमागहमी चल रही है । अभी हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि राफेल डील में देश की जनता के साथ धोखाधड़ी हुई है । मौजूदा मोदी सरकार अम्बानी परिवार को लाभ पहुँचाना चाहती है ।
हाल ही में फ्रांस की एक पत्रिका में छपे इंटरव्यू के अनुसार फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद ने कहा कि भारत सरकार की तरफ से ही रिलायंस का नाम दिया गया था। इसे चुनने में दैसॉ एविएशन की भूमिका नहीं है।
राफेल मामले में ओलांद ने कहा, ‘भारत की सरकार ने जिस सर्विस ग्रुप का नाम दिया, उससे दैसॉ ने बातचीत की। दैसॉ ने अनिल अंबानी से संपर्क किया क्योकि हमारे पास अन्य कोई विकल्प नहीं था।
इसे पहले सरकार ने इस मामले में दावा किया था कि दैसा और रिलायंस के बीच जो भी समझौता हुआ है वह एक कमर्शियल पैक्ट था जो कि दो प्राइवेट फर्म के बीच हुआ है इसमें भारत सरकार का कोई भी हस्तक्षेप नहीं है और ना ही कोई भूमिका है । जबकि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की साक्षात्कार में कही गयी बातों से भाजपा सरकार के पूरे दावें को एक सिरे से खारिज करते हुए नज़र आते है ।
इस पर कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने राफेल मामले में रीट्वीट करते हुए ओलांद से पूछा, ‘कृपया आप हमें यह भी बताएं कि राफेल डील कि कीमत 2012 में 590 करोड़ थी वह 2015 में 1690 करोड़ किस प्रकार से हो गई । मुझे ज्ञात है कि यूरो के कारण से कैलकुलेशन में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है ।
ग़ौरतलब है कि कांग्रेस इस बात को लेकर सरकार को घेरती रही है कि इस डील में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को क्यों नहीं शामिल किया गया। इस बात का जवाब देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली और निर्मला सीतारमण ने कहा कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड हथियार बनाने में पूर्ण रूप से सक्षम नहीं है ।
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि राफेल डील पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण देश व देश की जनता को गुमराह कर रही है । उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पूर्व प्रमुख टी सुवर्णा राजू के बयान के बाद उनसे इस्तीफा की भी मांग की थी ।

