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भारत ने दूर की रूस की चिंता

अगले महीने अक्टूबर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर आने वाले है । रूस के दौरे से पहले ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सबसे बड़ी चिंता सताई हुई थी  कि भारत हिन्द प्रशांत क्षेत्र में उनके भागीदारी के खिलाफ होगा । भारत ने रूस को स्पष्ट रूप से सांत्वना देते हुए कहा है कि कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी भागीदारी किसी देश के खिलाफ नहीं है ।
गौरतलब हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंद-प्रशांत के लिए ‘समग्रता के नजरिए’ को स्वीकार करते  हुए रूसी पक्ष ने महसूस किया कि कुछ ऐसे देश हो सकते हैं जो अपने हितों को पूरा करने के लिए हिंद-प्रशांत कॉन्सेप्ट में ‘हेरफेर’ करने का प्रयास कर रहे हों।
इसके बाद सुषमा स्वराज ने साफ साफ शब्दो में लावरोव से कहा कि भारत ने हमेशा जिम्मेदारी से काम किया है और हमेशा जिम्मेदारी निभायी भी है । भारत का व्यवहार कभी भी दोषपूर्ण नही रहा है और ना ही भारत के राष्ट्रीय चरित्र में कभी खोट रहा है ।  वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सभी को साथ लाने का प्रयास कर रहा है ।
गौरतलब है कि पिछले साल के  नवंबर में भारत, ऑस्ट्रेलिया,अमेरिका और जापान ने लंबित चतुष्कोणीय गठबंधन को आकार दिया था। इसका विशेष रूप से मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख समुद्री मार्गों को किसी के प्रभाव से मुक्त रखने के लिए नई रणनीति को प्रमुख रूप से तैयार करना है ।
फ्रांस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले महीने भारत आनेवाले हैं और हर वर्षो की तरह इस वर्ष भी सालाना भारत-रूस समिट के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सुरक्षा हालात पर चर्चा हो सकती है।
हिन्द प्रशांत क्षेत्र का मुद्दा इसलिए प्रमुख रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है क्यों कि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बड़ी भूमिका के लिए प्रयासरत है, जिसे कई देश क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल को रोकने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं। इस से कही ना कही रूस की चिंता बढ़ रही थी । लेकिन बहरत ने स्पष्ट रूप से इनके चिंता का समाधान कर दिए ।

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