राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर पर बीजेपी सहित कई दलों को भरोसा
कई महीनों की प्रक्रिया के बाद आखिरकार 31 अगस्त को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की फाइनल लिस्ट घोषित कर दी गई। एनआरसी की यह प्रक्रिया असम में चलाई जा रही थी। पहले इस की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2019 निर्धारित थी। मगर बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लोगों को कुछ और अतिरिक्त समय दिया गया था। ताकि वह अपनी नागरिकता का प्रमाण सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर सकें। अब एनआरसी की फाइनल लिस्ट घोषित हो चुकी है और इस लिस्ट के घोषित होने के बाद यह पता चला है कि 19 लाख से भी ज्यादा लोग इस लिस्ट से बाहर हो गए हैं। ऐसे में इस लिस्ट पर असम में बीजेपी सहित कई विपक्षी पार्टियों ने प्रश्न खड़े किए हैं। असम में बीजेपी के नेताओं ने कहा है कि वह केंद्र सरकार से मांग करेंगे कि एनआरसी पूरे देश में लागू किया जाए।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के आंकड़ों में की गई है गड़बड़ी

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की फाइनल लिस्ट में 19 लाख से ज्यादा लोगों के नाम नहीं हैं। ऐसे में असम बीजेपी ने केंद्र सरकार से कहा है कि यदि किसी सही भारतीय के खिलाफ विदेशी ट्रिब्यूनल कोई आदेश देता है तो राज्य सरकार एक विधेयक लाएगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इसके री वेरिफिकेशन की भी मांग की है। असम सरकार में मंत्री हिमन्ता बिसवा सरमा ने दावा किया है कि आंकड़ों में गड़बड़ी की गई है। आंकड़ों में गड़बड़ी के सबूत उनके पास है।
असम कांग्रेस ने भी सरकार पर लगाया आरोप
असम राज्य की कांग्रेस इकाई ने भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ठीक प्रकार से एनआरसी ले आने में सफल नहीं रही है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई ने कहा कि कई ऐसे भारतीय हैं जिनके नाम एनआरसी लिस्ट में शामिल नहीं किए गए हैं। जबकि विदेशियों के नाम बनारसी लिस्ट में शामिल कर लिए गए हैं।
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