चुनाव सुधारक टीएन शेषन नहीं रहे
इस अवार्ड से इन्हें 1996 में सम्मानित किया गया था। मुख्य रूप से भारत की चुनाव व्यवस्था को नया आयाम देने का श्रेय टी एन शेषन जी को जाता है। शेषन 1955 बैच के आईएएस टॉपर भी थे। करीब 20 सालों तक नेताओं और चुनाव के बीच सिर्फ और सिर्फ टी एन शेषन जी के नाम का दबदबा नज़र आता रहा। टी एन सेशन मुख्य रूप से भारत में चुनाव सुधारक के रूप में जाने जाते हैं।

वह पहले ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त थे जो नौकरशाही के पक्षधर नहीं थे। सरकार के चाहने पर कार्य करना उनका उद्देश्य नहीं हुआ करता था। उनकी प्रसिद्धि का मुख्य कारण यही मात्र था कि वह जिस भी मंत्रालय में काम के लिए पहुंचे, वह मंत्रालय पूरी तरह सुधर गया। राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल बलिराम भगत को भी शेषन का कोपभाजन बनना पड़ा था जब उन्होंने एक बिहारी अफ़सर को पुलिस का महानिदेशक बनाने की कोशिश की। उसी तरह पूर्वी उत्तर प्रदेश में पूर्व खाद्य राज्य मंत्री कल्पनाथ राय को चुनाव प्रचार बंद हो जाने के बाद अपने भतीजे के लिए चुनाव प्रचार करते हुए पकड़ा गया। ज़िला मजिस्ट्रेट ने उनके भाषण को बीच में रोकते हुए उन्हें चेतावनी दी कि अगर उन्होंने भाषण देना जारी रखा तो चुनाव आयोग को वो चुनाव रद्द करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी।
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इन्हें देश के 10 चुनाव आयुक्त के तौर पर उन्हें कई सुधारों का श्रेय दिया जाता है। चुनाव सुधारक टीएन शेषन का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। रविवार को करीब 9:30 बजे चेन्नई स्थित अपने घर में उन्होंने अंतिम सांस ली। टी एन सेशन जी की पिछले कुछ दिनों से तबीयत खराब चल रही थी। वह भारत में चुनाव नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए भी जाने जाते हैं। चार-पांच महीने पहले टीएन सेशन जी के मौत के खबरों की अफवाह सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई थी।

