चुनाव आयोग हुआ सख्त, विवादित बयान देने वालों पर भी कार्यवाही
लोकसभा चुनावों के मद्देनजर सभी पार्टियां प्रत्याशियों के लिए जनता को लुभाने में लगी हुई है। इसके लिए सभी पार्टियों के नेता लगातार जनसभाएं कर रहे हैं। मगर इस जनसभा के दौरान नेताओं की जुबान ऐसी फिसली कि देखते ही देखते लोग उनका विरोध करने लगे। इस कड़ी में कोई एक पार्टी आगे नहीं है बल्कि सभी पार्टियों की कोई न कोई नेता विवादित बयान देने के चक्कर में फंस गए हैं और जब कोई पार्टी का नेता विवादित बयान देता है तो दूसरी पार्टी के नेता चुनाव आयोग से उसकी शिकायत करते हैं। चुनाव आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए विवादित बयान देने वालों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है और उनके चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है।
चुनाव प्रचार के दौरान आचार संहिता का उल्लंघन करने के कारण चुनाव आयोग ने केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की नेता मेनका गांधी पर 48 घंटे के लिए चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है। वहीं उन्होंने समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के ऊपर जयाप्रदा पर विवादित टिप्पणी करने के कारण 72 घंटे के लिए चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है। आजम खान पर यह सख्ती मंगलवार को सुबह 10:00 बजे से शुरू होगी।
भाजपा नेता मेनका गांधी ने सुल्तानपुर में एक रैली के दौरान कहा था कि उन्हें मुसलमानों के कम वोट मिलते हैं तो उन्हें उनके लिए काम करने में अच्छा नहीं लगता। वहीं पर रामपुर से लोकसभा प्रत्याशी आजम खान ने भारतीय जनता पार्टी की रामपुर से लोकसभा प्रत्याशी जया प्रदा पर बहुत ही अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। जिसके कारण उनकी लगातार आलोचना हो रही है। आजम खान का विरोध करने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस मामले पर सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी चुप हैं।
हैरानी वाली बात यह है कि जयाप्रदा के खिलाफ इतनी अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के बाद भी आजम खान पर समाजवादी पार्टी की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई। बल्कि उनका बचाव किया जाता रहा। इसके पहले चुनाव आयोग ने भी आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ पर 72 घंटे और मायावती पर 48 घंटे के लिए चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी थी।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



