पिछड़े सामान्य वर्ग के 10 फीसदी आरक्षण के लिए अब शिक्षण संस्थानों में बढ़ेगी 2 लाख सीटें
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने सामान्य वर्ग के पिछड़े लोगों के 10 फीसदी आरक्षण को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। हालांकि इस फैसले के लेने के पीछे लोकसभा चुनाव में वोट पाने की संभावनाओं को दरकिनार नहीं किया जा सकता। मगर इसे आचार संहिता का उल्लंघन इसलिए नहीं माना जा रहा क्योंकि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आचार संहिता लागू होने से पहले ही चुनाव आयोग से इसकी इजाजत ले ली थी। कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले में अब देशभर के 158 केंद्र संस्थानों में 10 फीसदी सामान्य वर्ग के पिछड़े लोगों के आरक्षण के लिए लगभग 2लाख 15हार सीटें बढ़ाई जाएंगी।
कैबिनेट के इस फैसले के साथ ही प्रत्येक भी 20 छात्र पर एक शिक्षक की भर्ती की प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू हो जाएगी। कुल 2,14,766 छात्रों के लिए सीटों को बढ़ाया गया है। जिसके लिए 4315.15 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। जिसमें 2019-20 में 1,19,983 सीटें 2020-21 में 95,783 सीटें भरी जाएंगी। इस पूरे प्रक्रिया के लिए जितने धन की मंजूरी दी गई है वह छात्रों की मूलभूत सुविधाओं और शिक्षकों की नियुक्ति के लिए प्रयोग की जाएगी।
इसी वर्ष केंद्र सरकार ने संसद में पिछड़े सामान्य वर्ग के लिए शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10 की असली आरक्षण की व्यवस्था लागू की थी। जो कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के 50% आरक्षण से अलग होगी। अब नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक कैग के अलावा एक डिप्टी कैग का भी पद होगा। जो राज्य ऑडिट तथा वहां की सूचनाओं का कि सूचनाओं का समन्वय करेगा तथा दूरसंचार विभाग के लेखा जोखा का कार्य भी देखेगा। इसकी नियुक्त पर 21 लाख रुपए का खर्च आएगा।
इसके अलावा केंद्र सरकार ने जीएसएलवी के चौथे चरण के कार्यक्रम को आगे जारी रखने के लिए अतिरिक्त धन की मंजूरी दी है। इसका पूरा खर्च 2729.13 करोड़ रुपए का आएगा। जिसमें 2021-24 के मध्य 5 रॉकेट लॉन्च किए जाएंगे। इसके अलावा आयुर्वेद और होम्योपैथी के जानकार लोगों को बोलीविया में नौकरी भी मिल पाएगी।

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