बीसवीं सदी के मशहूर शायर : अहमद फराज़ – एक संक्षिप्त परिचय!!
अहमद फराज़ साहब, बीसवीं सदी के मशहूर शायर रहे। वे मूलतः एक पाकिस्तानी शायर थे जो जो दुनिया भर की आवाम के चहेते हैं। भारत में उन्हें विशेष प्यार और इज्जत हासिल हुई। आप उर्दू-हिन्दी साहित्य से गुजरे और आपको अहमद फराज़ का नाम न मिले यह यकीनन नामुमकिन सा है!! 12 जनवरी 1931 को पैदा हुए इस शख्सियत ने मुशायरें की कई काली रातों में काले अक्षरों से वो कायनात बसाई कि आज भी समूचा विश्व इनका कायल हैं। 25 अगस्त 2008 को वे इस धरती रूखसत हुए पर इस बीच इतना कुछ कर गए कि आने वाली हर नस्ल तहजीब और अदब से उनका नाम याद करेगी!! फराज़ साहब ने जो लिखा वे अक्सर कहते थे कि उन्हें मजदूरी उनकी मेहनत से ज्यादा मिल गयी है, पर यकीनन ये उनका बड़प्पन ही कहा जाएगा!!
प्रसिद्ध गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने इस बीसवीं सदी के मशहूर शायर अहमद फ़राज साहब के बारे में कभी कहा था कि “फ़राज़ अपने वतन के मज़लूमों के साथी हैं। उन्हीं की तरह तड़पते हैं मगर रोते नहीं, बल्कि उन जंजीरों को तोड़ते नजर आते हैं जो उनके समाज को जकड़े हुए हैं”। फराज़ साहब का कलाम चाहे वो नज्मों के रूप में हो, शेरो-शायरी हो, या गजलें अपने चाहने वालों को या उन्हें पढने वालों को वे मुरीद कर ही देते हैं!! “सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं, अव्वल-अव्वल की दोस्ती है अभी। इस कदर मुसलसल थी शिद्दतें जुदाई की से लेकर जब तिरि याद के जुगनु चमके जैसे रोमानी गजलें लिखने वाले फराज़ बीती सदी में मुशायरों के बादशाह हुआ करते थे!!
बीसवीं सदी के मशहूर शायर का साहित्य –
तख्लीक़, तसलसुल, वापसी, सरहदें और सवाल जैसी शानदार नज्में लिखने वाले बीसवीं सदी के मशहूर शायर अहमद फराज़ साहब यूँ ही नहीं लोगों के दिलों में उतर गए। उन्होनें जो लिखा न तो वैसा कोई लिख पाएगा और न उस तीक्ष्ण वेदना या दर्द को ही महसूस कर पाएगा जो फराज़ ने जी है। उन्हें बहुत से सम्मान व पुरस्कारों से भी नवाज़ा गया या ये भी कह सकते हैं कि ये पुरस्कार स्वयं को भी सम्मानित महसूस कर रहे थे। क्योंकि उन्हें फराज़ ने हासिल किया था। उनको मिलने वाले कुछ सम्मानों की फेहरिस्त कुछ इस प्रकार हैं: ‘आदमजी अवार्ड’, ‘अबासीन अवार्ड’, ‘फ़िराक़ गोरखपुरी अवार्ड’(भारत), ‘एकेडमी ऑफ़ उर्दू लिट्रेचर अवार्ड’ (कनाडा), ‘टाटा अवार्ड जमशेदनगर’(भारत), ‘अकादमी अदबियात-ए-पाकिस्तान का ‘कमाल-ए-फ़न’ अवार्ड, साहित्य की विशेष सेवा के लिए ‘हिलाल-ए-इम्तियाज़’।
बीसवीं सदी के मशहूर शायर अहमद फराज़ की किताबें –
उन्होनें कई काव्य संग्रह भी प्रकाशित किए जैसे जानाँ-जानाँ’, ‘ख़्वाब-ए-गुल परेशाँ है’, ‘ग़ज़ल बहा न करो’, ‘दर्द-ए-आशोब’, ‘तन्हा तन्हा’, ‘नायाफ़्त’, ‘नाबीना शहर में आईना’, ‘बेआवाज़ गली कूचों में’, ‘पस-ए-अंदाज़ मौसम’, ‘शब ख़ून’, ‘बोदलक’, ‘यह सब मेरी आवाज़ें हैं’, ‘मेरे ख़्वाब रेज़ा रेज़ा’, ‘ऐ इश्क़ जफ़ा पेशा’ आप इनको पढते वक्त किसी और ही देश-ओ-दुनिया में पहुँच जाते हैं। जहाँ तन्हाई है, आक्रोश है, हिज्र है, आँसू है पर उसके साथ संघर्ष भी!! एक मुक्कमल इंसान के रूप में तस्दीक हेतु आप फराज़ साहब के कलाम को अपने दिल में जरूर उतारिए!
अंत में चलते-चलते बीसवीं सदी के मशहूर शायर अहमद फराज़ के सीधे दिल में उतरने वाले उनके कुछ नायाब शेर जो आपके ज़हन से कभी नहीं निकलेगें!!
1.)इस से पहले कि बेवफ़ा हो जाएँ
क्यूँ न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ!!2.) रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ,
आ फिर से मुझे छोड़ जाने के लिए आ!!3.) किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंजिल,
कोई हमारी तरह उम्र भर सफर में रहा!!4.) कुर्बतोँ मेँ भी जुदाई के जमाने माँगे,
दिल वो बेमहर कि रोने के बहाने माँगे,
अपना ये हाल कि जी हार चुके, लुट भी चुके,
और मोहब्बत वही अन्दाज पुराने माँगे!!5.) आज फिर दिल ने कहा आओ भुला दे यादें,,
ज़िन्दगी बीत गयी और वही यादें-यादें!!
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