मेरे जज़्बात की कहानी
यूँही नही ये दिल भारी है,
आज इश्क़ की बाज़ी हारी है।
वो जान के भी अनजानी है,
चलो गलती हमने ही मानी है।
हर किस्सा तेरा नुरानी है,
जज़्बात की मेरी कहानी है।
तुम प्यार हो मेरा! दोस्त नही,
ये बात देर से जानी है।
रंगों की महफ़िल सजी हुई है,
आज तो उसकी सगाई है।
हार गया ये दिल मेरा अब,
देख कर उसकी विदाई है।
थाम कर मेरा हाथ वो पगली,
बोल गई वो लाइन पुरानी।
“मेरी याद तो तुझको आएगी न”
अब ये बात भी उसको क्या समझानी।
देख के मुझको हैरान खड़ी थी,
जैसे होठों की चुप्पी समझ चुकी थी।
नज़दीक से देख रहा था मैं भी,
दूर बहुत जो चली गयी थी।
मुहब्बत तो हर लम्हे में थी,
जो साथ मे हमने जीयी थी।
वो यादें भी कितनी रूहानी है,
ये ज़िन्दगी ऐसे ही बितानी है।
वो रातें वो चैटिंग,
तेरा समझना-समझाना।
तेरी बातों का वो दरिया,
ओर मेरा डूब जाना।
स्कूल से लेकर कॉलेज तक,
तेरे रोने से मेरे हँसने तक।
काश ये ज़िन्दगी ऐसी ही रहती,
मेरे खुदा के पास पहुंचने तक।

