जानिए सरकार ने क्यों दी ? करतारपुर कॉरिडोर को मंजूरी ।
केंद्र सरकार ने एक साल बाद गुरु नानक देव की 550वी जयंती मनाने के उपलक्ष्य में करतारपुर कॉरिडोर को मंजूरी देकर बड़ा फैसला लिया है । 22 नवंबर गुरुवार को केबिनेट मीटिंग में करतारपुर कॉरिडोर को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है । इस फैसले के साथ सिक्खों का 70 साल का इंतजार खत्म हो गया है । हम आपको बता दें कि सिख समुदाय के लोगों के लिए करतार साहब काफी मायने रखते हैं । इस स्थल को सिख लोग बहुत पवित्र तीर्थ स्थल मानते हैं । यहां गुरु नानक देव ने अपने जीवन के 18 साल बिताए थे ।
जानिए सरकार ने क्यों दी ? करतारपुर कॉरिडोर को मंजूरी ।
करतारपुर कॉरिडोर बनने के बाद सिख श्रद्धालु खुद गुरदासपुर जिले में करतारपुर साहिब जाकर दर्शन कर लेंगे। फिलहाल यह पवित्र स्थल पाकिस्तान में भारतीय सीमा से करीब चार किलोमीटर दूर स्थित है और अभी पंजाब के गुरदासपुर में डेरा बाबा नानक बॉर्डर आउटपोस्ट से दूरबीन से श्रद्धालु दर्शन किया करते हैं ।
सिखों की माने तो इनके प्रथम गुरु गुरुनानक देव ने करतारपुर साहिब में अपने जीवन के 18 साल लगाए थे । श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारे को पहला गुरुद्वारा के नाम से जाना जाता है । जिसकी नींव श्री गुरु नानक देव जी ने रचित की थी । हालांकि बाद में रावी नदी में बाढ़ के कारण यह विलुप्त हो गया । इसके बाद वर्तमान गुरुद्वारा महाराजा रंजीत सिंह ने इसको तैयार करवाया था ।
करतारपुर कॉरिडोर के बारे में यहां के लोग बताते हैं कि इलाके के गवर्नर दुनीचंद की गुरुनानक से पखोके में मुलाकात हुई थी और उन्हें 100 एकड़ जमीन दान में दी थी । गुरुनानक ने भेंट स्वीकार करके और वहां रहकर एक छोटी इमारत का निर्माण कराया था । यही नहीं उन्होंने वहीं रहकर भूमि की जुताई भी की थी और कई प्रकार की फसलें उगाई थी । यह गुरुद्वारा शंकरगढ़ तहसील के कोटी पिंड में रावी नदी के पास स्थित है ।
सिख लोग अपनी मांग को एक दोहा के रूप में भी समर्पित करते हैं । ”श्री ननकाना साहिब ते होर गुरुद्वारेया, गुरुधामा दे, जिन्ना तो पंथ नू विछोड़या गया है , खुले दर्शन दीदार ते सेवा संभाल दा दान खालसा जी नू बख्शो………।” इस दुआ का मतलब है कि ननकाना साहिब और बाकी गुरुद्वारे या गुरुधाम जो बंटवारे के चलते पाकिस्तान में चले गए थे उनकी खुले दर्शन सिख श्रद्धालु लोग कर सकें इसकी हम मांग करते हैं ।
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