गरमाया राजस्थान विधानसभा चुनाव – क्या जयपुर के ” सियासी सिंहासन ” का उत्तराधिकारी मेवाड़ की जनता फिर से बदलेगी ?
राजस्थान विधानसभा चुनाव – जयपुर के मेवाड़ में एक कहावत है :- ” तवे की रोटी अलटते -पलटते रहना चाहिए ” नहीं तो रोटी के कच्चे रहने का खतरा बना रहता है । मेवाड़ की यह कहावत पिछले दो दशक से यहां की प्रचलित कहावत है और यहां की राजनीति की सच्चाई में बन गई है । सन 1998 से लगातार जयपुर के मेवाड़ की जनता सत्ता की रोटी पलटती चली आ रही है । जो यहां के जनता के मुताबिक इसकी आदत बन गई है ।
गरमाया राजस्थान विधानसभा चुनाव – क्या जयपुर के ” सियासी सिंहासन ” का उत्तराधिकारी मेवाड़ की जनता फिर से बदलेगी
अगर राजस्थान विधानसभा चुनाव में मेवाड़ के माहौल की बात की जाए तो इन चुनावों में भी वसुंधरा राजे की सरकार से जनता बहुत नाराजगी के साथ-साथ अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से नाराजगी , विकास के मुद्दे , युवाओं में बेरोजगारी को लेकर उपजा आक्रोश , किसानों के मुद्दे , राजपूत की नाराजगी , कारोबारियों की नाराजगी जैसी तमाम चीजें ‘ सत्ता की रोटी पलटने ‘ का इशारा दे रही है ।
मेवाड़ के कुल छह जिलों चित्तौड़ , राजसमंद , उदयपुर प्रतापगढ़ , डूंगरपुर और बांसवाड़ा में कुल 28 सीटें आती हैं। इनमें भीलवाड़ा भी शामिल कर लिया जाए , तो यह आंकड़ा 35 सीट का हो जाता है । राजस्थान विधानसभा चुनाव में मेवाड़ की 28 सीटों में अभी तो एक निर्दलीय , 2 कांग्रेस और 25 भाजपा के पास है । इतना ही नहीं कुल 28 सीटों में से 16 सीटें आदिवासी क्षेत्र की है ।
उदयपुर के मेवाड़ क्षेत्र में वसुंधरा सरकार से नाराजगी के साथ साथ जमीनी स्तर पर भी भाजपा के प्रति जनता बहुत ज्यादा खुश नहीं है । क्योंकि मेवाड़ के तमाम जिलों में स्थानीय निकायों में कार्य ना होने को लेकर भाजपा के खिलाफ जनता की नाराजगी बहुत ज्यादा बढ़ गई है ।
राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा की एक परेशानी यह भी है कि यहाँ पर राष्ट्रीय स्तर के किसी बड़े नेता नही है । मेवाड़ से अब तक बने चार मुख्यमंत्री हीरालाल देवपुरा , शिवचरण माथुर , मोहनलाल सुखाड़िया और हरदेव जोशी कांग्रेस पार्टी से ही रहे हैं । भाजपा के यहां दो बड़े चेहरे किरण महेश्वरी और गुलाबचंद कटारिया दोनों ही लोग प्रदेश स्तर के उत्कृष्ट नेता हैं । लेकिन इन दोनों लोगों का आपस में हमेशा मतभेद रहता है ।
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