महाबलीपुरम की अनौपचारिक बैठक में सूरज सकते हैं भारत चीन के कई मुद्दे
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में कोई भी देश किसी भी देश का सदैव के लिए दुश्मन नहीं होता और कोई भी देश किसी भी देश का हमेशा के लिए दोस्त नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नज़दीकियां और दूरियां बनती बिगड़ती रहती हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंध अक्सर लाभ के हिसाब से परिवर्तित और मजबूत होते रहते हैं।
11 अक्टूबर को महाबलीपुरम में होने वाली भारत और चीन के बीच दूसरी अनौपचारिक बैठक में भारत चीन के कई मुद्दे सुलझ सकते हैं। वर्तमान समय में दोनों देश कई तरह की आंतरिक और बाह्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। भारत जहां आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। वहीं चीन अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर में फंसा हुआ है। आर्थिक समस्याओं की बात करें तो भारत में जम्मू कश्मीर और चीन में हांगकांग दोनों के लिए समस्याएं उत्पन्न कर रहे हैं।
बैठक में उठाए जाएंगे भारत चीन के कई मुद्दे
भारत और चीन दोनों देश एशिया की महाशक्ति के रूप में जाने जाते हैं मगर वर्तमान समय में दोनों देशों की आंतरिक एवं बाह्य परिस्थितियां एक समान है। अंतरराष्ट्रीय तौर पर देखा जाए तो चीन अमेरिका के साथ लगातार जारी ट्रेड वॉर के कारण अपनी अर्थव्यवस्था में काफी नुकसान उठा रहा है तो वहीं भारत भी आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। चीन पाकिस्तान के कारण जम्मू कश्मीर के मुद्दे का अंतरराष्ट्रीय करण करने का प्रयास कर रहा है जो भारत के लिए चिंता का विषय है तो वहीं चीन भी अपने देश के अंदर हांगकांग की समस्या से जूझ रहा है। हाल ही में अमेरिका ने उस पर कोई गैर मुसलमानों के अत्याचार के कारण कई तरह के प्रतिबंध भी लगा दिए हैं।
भले ही दोनों देशों के राष्ट्र अध्यक्षों के बीच हुई बात को सार्वजनिक ना किया जाए परंतु डोकलाम विवाद के बाद जिस तरह वुहान में अनौपचारिक बैठक में डोकलाम विवाद को सुलझाने में मदद की थी। उसी तरह अनुमान लगाया जा सकता है कि महाबलीपुरम की अनौपचारिक बैठक के बाद जम्मू कश्मीर का मुद्दा भारत और चीन के बीच सुलझ जाएगा। वहीं चीन भारत से व्यापार बढ़ाने के पक्ष में बात कर सकता है।
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