आस्था – विश्वास का दिव्य कुंभ
आस्था, विश्वास, सौहार्द एवं संस्कृतियों के मिलन का पर्व है “कुंभ”। इसका शाब्दिक अर्थ है कलश और यहाँ ‘कलश’ का संबंध अमृत कलश से है। ज्ञान, चेतना और उसका परस्पर मंथन कुंभ मेले का वो आयाम है जो आदि काल से ही हिन्दू धर्मावलम्बियों की जागृत चेतना को बिना किसी आमन्त्रण के खींच कर ले आता है। कुंभ पर्व किसी इतिहास निर्माण के दृष्टिकोण से नहीं शुरू हुआ था अपितु इसका इतिहास समय द्वारा स्वयं ही बना दिया गया। वैसे भी धार्मिक परम्पराएँ हमेशा आस्था एवं विश्वास के आधार पर…
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