एससी-एसटी पदोन्नति आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को रखा बरकरार
देश की सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक फैसला देते हुए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों को सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण देने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। न्यायालय लेने 3 महीने के अंदर आदेश का पालन करने को कहा था जिसमें सरकार सफल नहीं हो पाई। फिलहाल न्यायाधीश एस ए बोबडे और अब्दुल नजीर ने यथा स्थिति को उसी तरह बनाए रखने का आदेश दिया है।
5 सीटों की संवैधानिक पीठ ने पिछले साल नवंबर में यह फैसला दिया था कि सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को लागू करने के लिए अधिकारी बाध्य हैं। संवैधानिक पीठ ने नागराज के मामले को संशोधित करते हुए कहा था कि पदोन्नति में आरक्षण के लिए उचित व्यवस्था की जाए।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आरक्षण से प्रशासनिक दक्षता पर क्या प्रभाव पड़ते हैं। इसकी बकायदा जांच होनी चाहिए और इस मामले पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है। इसके पहले केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि दिल्ली उच्च न्यायालय को इस तरह के आदेश नहीं पारित करने चाहिए। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने अभी यथास्थिति को बनाए रखने का आदेश दिया है।
इसके पहले केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल राव ने कहा था कि एससी एसटी समुदाय को नौकरियों में आरक्षण को लेकर फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगी क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला केंद्र के लिए उचित नहीं है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले साल नवंबर में सरकार को अदालत के फैसले को लागू करने को कहा था जोकि पिछले कुछ समय से लागू नहीं हो पाया था।
दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी और पीठ से कहा था कि 3 महीने में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व पता लगा पाना संभव नहीं है इसलिए उसे और भी समय दिया जाना चाहिए।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



