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सुप्रीम कोर्ट का आदेश, शराब से होने वाले अपराध के लिए नहीं है राज्य सरकार जिम्मेदार

हमारे देश में अपराध की संख्या दिन-प्रति-दिन बढ़ती जा रही है। कई राज्यों में अपराध की संख्या में कमी की जगह बढ़ोतरी देखने को मिली है और यदि उसके तह तक जाया जाए तो यह पता चलता है कि कई अपराध ऐसे हैं जो कि शराब के नशे में किए जाते हैं। कुछ लोग शराब पीकर अपना मानसिक संतुलन खो कर अपराध कर देते हैं। हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट ने कुछ दिनों पहले एक फैसला दिया था जिसमें उसने कहा था कि क्योंकि राज्य सरकार अपनी कंपनी के द्वारा राज्य में शराब बेचती है इसलिए शराब से होने वाले अपराध के लिए राज्य सरकार को ही दोषी ठहराया जाना चाहिए। मगर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश बिल्कुल अलग आया है। सुप्रीम कोर्ट ने शराब से होने वाले अपराध के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार मानने से इनकार कर दिया है।

इस मामले पर ऐसा रहा सुप्रीम कोर्ट का आदेश

दरअसल गत 26 मार्च को दिए गए एक फैसले में मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के खिलाफ एक फैसला दिया था। जिसमें यह कहा गया था कि शराब के कारण होने वाले अपराध के लिए सरकार को भारतीय दंड संहिता की धारा 107 के तहत अपराधी माना जाना चाहिए। क्योंकि सरकार शराब से होने वाले अपराधों के लिए अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती।

मद्रास हाई कोर्ट के इस फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ अलग ही आदेश दिया है। तमिलनाडु के एडिशनल एडवोकेट जनरल बालाजी श्रीनिवासन ने कहा था कि आत्म हत्या के एक मामले को हाईकोर्ट ने मनमाने तरीके से जनहित याचिका के तौर पर विचार किया। उन्होंने कहा कि क्या सड़क दुर्घटना से होने वाली मौतों के लिए वाहन निर्माताओं और कैंसर के लिए सिगरेट निर्माताओं को दोषी ठहराया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए यह कह दिया है कि राज्य सरकार को शराब से होने वाले अपराधों के लिए किसी भी प्रकार से दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश, शराब से होने वाले अपराध के लिए नहीं है राज्य सरकार जिम्मेदार
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश, शराब से होने वाले अपराध के लिए नहीं है राज्य सरकार जिम्मेदार
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मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को पलटने के बाद सुप्रीम कोर्ट का आदेश यह है कि शराब से होने वाले अपराध के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
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