SC/ST एक्ट विवाद : जानिए क्या है पूरा मामला
आजकल हमारे देश में SC/ST एक्ट को लेकर काफी हंगामा मचा हुआ है। चारों तरफ अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून में कुछ बदलाव किए हैं जिसके चलते देश के तमाम दलित संगठन विरोध में सड़क पर उतर आए हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, पंजाब, राजस्थान, और मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर हिंसा हो रही है। इस हिंसा में अब तक कुछ लोगों की जान भी जा चुकी है।
SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ केंद्र सरकार ने सोमवार को रिव्यु पेटिशन दाखिल कर दी है। साथ ही ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ SC/ST आर्गेनाईजेशन ने भी एक याचिका दायर कर मुद्दा पांच जजों की संविधान पीठ को सौपने की मांग की है। हालाँकि, इस मुद्दे पर जल्द सुनवाई करने से कोर्ट ने इंकार कर दिया।
क्या – क्या बदलाव किया गए ?
– SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज होने के बाद आरोपी की तत्काल गिरफ़्तारी नहीं होगी।
– आरोपी की डीएसपी स्तर का अधिकारी जाँच करेगा। आरोप सही पाए गए तभी करवाई होगी।
– कोई सरकारी कर्मचारी अधिनियम का दुरूपयोग करता है तो उसकी गिरफ़्तारी के लिए विभागीय अधिकारी की अनुमति जरुरी होगी।
– आम आदमियों के लिए गिरफ़्तारी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक की अनुमति के बाद होगी।
– ऐसा मामला आने पर अब कोर्ट इसमें सुनवाई के बाद ही फैसला लेगा। अभी तक कोर्ट अग्रिम जमानत नहीं देता था।
क्यों किए गए बदलाव ?
– एससी समुदाय के एक शख्स ने महाराष्ट्र के एक सरकारी अधिकारी सुभाष काशीनाथ महाजन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में शख्स ने महाजन पर अपने ऊपर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में दो जूनियर कर्मचारी के खिलाफ कानूनी करवाई पर रोक लगाने का आरोप लगाया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि उन एम्प्लाइज ने जातिसूचक टिप्पणी की थी।
गैर – अनुसूचित जाति के इन अधिकारिओं ने उस व्यक्ति की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में उसके खिलाफ टिप्पणी की थी। जब मामले की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी ने अधिकारिओं के खिलाफ करवाई के लिए उनके वरिष्ठ अधिकारिओं से इजाजत मांगी तो इजाजत नहीं दी गई। इसपर उनके खिलाफ भी पुलिस में मामला दर्ज कर दिया गया।
वचाव पक्ष का कहना है कि अगर किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति के खिलाफ ईमानदार टिप्पणी करना अपराध हो जायेगा तो इससे काम करना मुश्किल हो जायेगा।
– काशीनाथ महाजन ने FIR खारिज करने के लिए हाई कोर्ट का रूख किया था, लेकिन बॉम्बे उच्च न्यायलय ने इससे इंकार कर दिया था।
– इसके बाद महाजन ने हाई कोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। इस पर शीर्ष अदालत ने उनपर से FIR हटाने का आदेश देते हुए SC/ST एक्ट के तहत तत्काल गिरफ़्तारी पर रोक का आदेश दिया था। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दे दी थी।
NCRB 2016 कि रिपोर्ट के मुताबिक, देश भर में जातिसूचक गली – गलौज के 11060 मामलों कि शिकायत सामने आई थी। इसमें से 935 शिकायतें झूठी पाई गई।
Writer at India Alive

