सुप्रीम कोर्ट का फैसला एडल्ट्री अपराध की श्रेणी में नहीं
एडल्ट्री को अपराध बताने वाले प्रावधान जो आईपीसी की धारा 497 में उल्लिखित है । इसे आज सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दे दिया है । सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की बेंच जस्टिस ए एम खानविलकर , जस्टिस दीपक मिश्रा , जस्टिस चंद्रचूड़ , जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस आर एफ नरीमन सभी के द्वारा एडल्ट्री को अपराध मानने से इंकार कर दिया गया और इसे असंवैधानिक करार दे दिया गया है ।
सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए महिलाओं का अधिकार , उनकी इच्छा और उनके सम्मान को सर्वोच्च श्रेणी में रखा और कहा कि किसी भी महिला का पति उसका मालिक नहीं होता । उन्हें किसी भी प्रकार से सेक्सुअल च्वाइस के लिए रोका या उनपर दबाव नहीं डाला जा सकता । उन्होंने कहा कि एडल्ट्री तलाक के आधार पर हो सकता है और इस मामले में इसके चलते खुदकुशी के मामले में न्यायालय में केस दर्ज भी कराया जा सकता है ।
इससे पहले 8 अगस्त को इस मामले पर सुनवाई हुई थी और सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर हुई सुनवाई का फैसला अपने पास सुरक्षित रख लिया था । सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि एडल्ट्री एक अपराध की श्रेणी में आता है । इस अपराध के कारण घर , परिवार , विवाह सारी चीजें तबाह हो जाती है । इसके पश्चात सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा के अधीन संवैधानिक बेंच ने यह निर्णय लिया था कि इस मामले पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा ।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका का कहना था कि आईपीसी की धारा 497 में जो भी कानून बनाए गए है वह केवल पुरुषों के साथ भेदभाव करने वाला है । इसमें पुरुष और महिलाओं को समानता का अधिकार नहीं है ।
इस याचिका में उल्लिखित था कि अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी शादीशुदा महिला से उसके इज़ाज़त से शारीरिक संबंध बनाता है तो इसमें संबंध बनाने वाले पुरुष के खिलाफ उक्त महिला का पति उसके खिलाफ न्यायालय में केस दर्ज करा सकता है परंतु संबंध बनाने वाली महिला के खिलाफ किसी भी प्रकार का कोई भी प्रावधान , नियम व शर्त नहीं थे । यह प्रावधान पुरुष एवं महिला के समानता प्रदर्शित नहीं करता । इसलिए इसे असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए ।

