ईवीएम पर सवाल उठाने की जगह खुद की समीक्षा करें विपक्ष : रविशंकर प्रसाद
हमारे देश में चुनावों के दौरान ईवीएम पर सवाल खड़े किए जाने का मुद्दा कोई नया नहीं है। पिछले 2 वर्षों में जितने भी चुनाव संपन्न हुए हैं। उसमें विपक्षी दलों द्वारा ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया जाना उनका प्रमुख मुद्दा रहा। उन्होंने हर बार केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाया कि जहां पर भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीती है वहां पर ईवीएम में कुछ ना कुछ गड़बड़ी अवश्य हुई है। इस बार के लोकसभा चुनाव में भी मध्यप्रदेश में ईवीएम पर कई तरह के सवाल खड़े किए गए। मगर अभी तक विपक्ष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से जुड़ा कोई भी सबूत ऐसा देश नहीं कर पाया है। जिससे यह पता चल पाए कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ सच में छेड़छाड़ की गई हो।
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दिया यह जवाब
दरअसल राज्य सभा में चुनाव सुधार की आवश्यकता के विषय में बात करते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर सवाल उठाकर विपक्ष दोहरा रवैया अपना रहा है। यदि मनमोहन सिंह दो बार चुनाव जीते तो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन सही थी। ममता बनर्जी, मायावती और अन्य विपक्षी दलों के नेता चुनाव जीतें तब भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन सही थी मगर यदि नरेंद्र मोदी दो बार चुनाव जीत जाए तो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन खराब हो जाती है। विपक्ष का यह रवैया बहुत ही बेतुका और जनता को गुमराह करने वाला है।
क्या विपक्ष के लिए सही है ईवीएम पर सवाल उठाना?
अगर हम पिछले 2 साल में हुए चुनावों की समीक्षा करें तो यह पता चलता है कि विपक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर सवाल उठाकर इस मुद्दे को जनता के बीच जोर शोर से उछाला। मगर इसका कोई खास फायदा विपक्षी दलों को नहीं मिला। जनता के हित के मुद्दों पर ध्यान देने के जगह पर विपक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में केंद्र सरकार द्वारा की गई छेड़छाड़ को जनता के सामने प्रमुख मुद्दा बनाकर पेश किया। विपक्ष द्वारा उछाला गया यह मुद्दा जनता के बीच केवल एक मजाक बनकर रह गया। इससे विपक्ष को कोई भी फायदा नहीं हुआ।

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मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



