राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घूंघट प्रथा के खिलाफ खोला मोर्चा
राजस्थान हमारे देश का एक ऐसा राज्य है जहां पर पुरानी परंपराएं और प्रथाएं बहुत मान्यता रखती हैं। आज भी राजस्थान के कुछ इलाकों में लोग खाप पंचायतों के नाम से लोगों को डराते हैं। वहां पर लोगों को पुरानी परंपराओं में बंधे रहने के लिए बाध्य किया जाता है। मगर अब स्वयं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इन परंपराओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
एक कार्यक्रम में शामिल होते हुए अशोक गहलोत ने घूंघट प्रथा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि अब घूंघट का जमाना चला गया है। बहुत पुरानी बात थी जब घूंघट में रहना उचित माना जाता था। मगर अब वह समय नहीं है उन्होंने राजस्थान में प्रचलित डायन की कहानियां के बारे में भी बात करते हुए कहा कि डायन और जादू ऐसा कुछ नहीं होता। जादू दिखाने वाले जादूगर नहीं होते बल्कि वह अपनी ट्रिक से लोगों को जादू दिखाते हैं।
घूंघट प्रथा के खिलाफ लड़ना बहुत आवश्यक
मंगलवार को जयपुर में एक एकल नारी शक्ति नामक कार्यक्रम में शामिल होते हुए अशोक गहलोत ने कई महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने वहां पर कहा कि कांग्रेस सरकार ने स्थानीय और पंचायत स्तर पर महिलाओं को ताकत दी है। अब वह चला गया जब महिलाएं घर में घूंघट ओढ़ कर रहा करती थीं। हालांकि उन्होंने घूंघट किए हुए महिलाओं की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आप भी कुछ गांवों में महिलाएं घूंघट करती हैं। मगर अब यह उनके घूंघट से बाहर निकलने का समय है। सरकार पूरी तरह से उनके साथ खड़ी हुई है।
बाल विवाह को लेकर भी कही बात
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महिलाओं को आगे आने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि देशभर में बाल विवाह भी एक बड़ी समस्या है। कम उम्र में विवाह नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि हर जिले में महिलाओं की समस्या सुनने के लिए डिप्टी एसपी रैंक का एक अधिकारी केवल इसीलिए नियुक्त किया जाएगा।
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