तमिल के सुपरस्टार रजनीकांत अपने बयान से पलटे
तमिल के सुपरस्टार रजनीकांत को दुनिया और उनके फैंस भगवान का दर्जा देते है । 8 नवंबर 2016 को हुए नोट बंदी का उन्हों ने समर्थन किया था लेकिन हाल ही में अपने बयान से पलट गए और नोटबंदी के विषय में उन्होंने कहा कि नोटबंदी से देश अर्थव्यवस्था में गिरावट आई है । जिसकी वजह से यह कहा जा सकता है कि नोटबंदी का कार्यान्वयन दोषपूर्ण था । यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर सभी राजनेताओं और देश के महान व्यक्तित्व को विस्तार से चर्चा करनी चाहिए क्योंकि यह देश और देश के लोगों से संबंधित है ।
रजनीकांत का फिल्मी कैरियर काफी सफल कैरियर रहा है । ऐसे में लोगों के द्वारा यह उम्मीद जता रही है कि वो राजनीति में भी गठबंधन करने का सोच सकते हैं । वही अभिनेता रजनीकांत का कहना है कि वह औरों की तरह राजनीति नहीं करेंगे वह एक आध्यात्मिक राजनीति करने में विश्वास रखते हैं इससे इस बात की आशंका राजनीतिक पंडितों द्वारा जताई जा रही है कि वह भारतीय जनता पार्टी उन्हें अपने साथ लेने की कोशिश करने में कोई भी कसर नहीं चूकेगी । भारतीय जनता पार्टी उन्हें अपने साथ आने का निमंत्रण दे सकती है ।
तमिल के सुपरस्टार रजनीकांत आध्यात्मिक राजनीति के बारे में कई मौकों पर अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि वह ऐसी राजनीति करना चाहते हैं जो धर्म जाति छुआछूत भेदभाव इन सब चीजों से परे हो मगर उनके इस सोच और विचार से उनके विरोधी आश्वस्त नहीं है । गौरतलब है कि पिछले महीने तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी डीएमके ने इस बारे में कहा था कि आध्यात्मिक राजनीति दर्शाती है कि वह भारतीय जनता पार्टी के तरफ रजनीकांत का लगाव अधिक है और इसके साथ ही रजनीकांत के विचार ठीक उसी प्रकार के हैं जैसे कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सलाहकारों के विचार होते हैं डीएमके ने आरोप लगाया कि रजनीकांत राजनीति में सांप्रदायिक तत्वों को समर्थन दे रहे हैं ।

