PoK कॉरिडोर’ को नहीं मिलनी चाहिए मंजूरी
चीन और भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताएं हैं. भारत एक ऐसी सभ्यता रही है जिसने संपर्क में आने वाली सभी सभ्यताओं के साथ आग बढ़ने का काम किया. वहीं चीन ने कभी किसी के साथ पार्टनरशिप में नहीं रहा बल्कि बाहरी प्रभाव से बचने के लिए उसने कभी वॉल तो कभी आइरन कर्टेन का सहारा लिया. इसी से निर्धारित होता है इन दोनों देशों का डीएनए जिससे साफ होता है कि चीन के डीएनए में ऐसी खामियां है कि उसके नेतृत्व में किसी गठजोड़ पर भरोसा नहीं किया जा सकता. बात जब CPEC या OBOR की हो तो यह और अहम हो जाता है कि चीन पर भरोसा किया तो प्रभाव अगले सैकड़ों वर्षों तक झेलना होगा.
OBOR इसलिए दुनिया के लिए बड़ा खतरा है क्योंकि यह चीन की तरफ से पहली कोशिश है जिसका असर पूरी दुनिया पर अगले सैकड़ों साल तक पड़ना तय है. OBOR के जरिए चीन एशिया और यूरोप के लिए ड्रेड रूट निर्धारित करने की तैयारी में है.
चीन दुनिया का सबसे बड़ा मैन्यूफैक्चरिंग हब है और OBOR की स्थापना हो जाने के बाद उसके लिए अपना मैन्यूफैक्चर्ड माल पूरे यूरोप और एशिया में वितरित करना आसान और फायदेमंद हो जाएगा. वहीं एशिया और यूरोप के बाकी देशों को इस नेटवर्क का इस्तेमाल करने के लिए पहले मैन्यूफैक्चरिंग में चीन को चुनौती देनी होगी.

