आज भी खुलेआम घूम रहा है निर्भया के साथ सबसे ज्यादा क्रूरता करने वाला ये आरोपी
आज से 7 साल पहले इसी दिन देश की एक बेटी के साथ बेहद ही घिनोना कांड हुआ था, जिसे लोग आज भी याद करते हैं तो उनकी रूह कांप जाती है। हमने उस बेटी को तो खो दिया लेकिन आज भी उस कांड के आरोपी जेल में चैन कि सांस ले रहे हैं। आप समझ गायब होंगे कि हम किसकी बात कर रहे हैं। दरअसल हम निभर्या केस की बात कर रहे हैं। आपको याद दिला दें कि इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाले 6 दरिंदों में एक नाबालिग भी शामिल था। हालांकि अब निर्भया के दोषियों को फांसी देने की हलचल तेज हो गई है, तो सबकी नजरें उन चारों हत्यारों पर टिकी हुई है।
लेकिन क्या आप निर्भया के उस 6ठें गुनहगार को भूल गए जिसने सारी हदें पर कर दी थी आवर जिसकी वजह से निर्भया की जान गई। वैसे आपको बताते चले कि वो 6ठा गुनाहगार भी अब अपने साथियों की मौत की खबर सुनकर सिहर रहा होगा।

नाबालिग था निर्भया का 6ठा आरोपी
जब इस घटना को अंजाम दिया गया उस दौरान यानी कि 16 दिसंबर 2012 को यह 6ठां आरोपी नाबलिक था, हालंकि कुुुछ महीने बाद ही 18 साल (बालिग) का हो जाता, लेकिन कानूनी रुप से घटना के समय नाबालिग होने की वजह से उसे सजा देने के बजाय बाल सुधार गृह भेजा गया, देश की जनता ने दिल पर पत्थर रखकर कोर्ट के उस फैसले को स्वीकार किया था, इस घटना के बाद नाबालिगों की उम्र 18 से घटाकर 16 साल किया गया, निर्भया के 6 दोषियों में से ये एक मात्र शख्स है, जिसका चेहरा आज तक देश की जनता से छुपा हुआ है।
क्या होता है डेथ वॉरंट, कौन जारी करता है इसे व क्या होती है फांसी देने की पूरी प्रकिया ? जानें सबकुछ
पर अब वो 24 साल का हो चुका है, कुछ साल बाल सुधार गृह में रहने के बाद दिसंबर 2016 में उसे मुक्त कर दिया गया, फिलहाल वो दक्षिण भारत के किसी राज्य में कुक का काम करता है, उसने दिल्ली के प्रेक्षणगृह में खाना पकाने का काम सीखा था। उस 6ठें गुनहगार को अपना असली पहचान और पुरानी जिंदगी की असलियत को छुपाने के लिये इसे दिल्ली-एनसीआर से बहुत दूर भेज दिया गया, ताकि लोगों को पता ना चल सके और वो एक नई जिंदगी शुरु कर सके, जहां वो काम करता है, वहां भी लोगों को उसके वास्तविक नाम और पिछली जिंदगी के बारे में कुछ भी पता नहीं है।
आपको जानकर बहुत ज्यादा गुस्सा आएगा क्योंकि इसी ने निर्भया के साथ सबसे ज्यादा क्रूरता नाबालिग ने की थी। वारदात से पहले वो दिल्ली से 240 किमी दूर एक गांव में रहता था, 11 साल की उम्र में वो अपने घर से भागकर दिल्ली पहुंचा था, दिल्ली आते ही उसकी मुलाकात राम सिंह से हुई, राम सिंह ने उसे बस की सफाई के लिये रख लिया और यहीं से उसकी नौकरी शुरु हो गई, राम सिंह ने निर्भया कांड के बाद तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

