क्या होता है डेथ वॉरंट, कौन जारी करता है इसे व क्या होती है फांसी देने की पूरी प्रकिया ? जानें सबकुछ
फांसी का नाम सुनते ही अच्छे अच्छों का रूह कांप जाता है, ऐसे में उन अपराधियों के बारे में जरा सोचिए उनका क्या हाल होता होगा जिन्हें पता चलता होगा कि उनके अपराधों की सजा फांसी मिली हुई है। आज के समय में निर्भया के दोषियों का हाल कुछ ऐसा ही है, जी हां जब से उन्होने सुना है कि उनकी फांसी के दिन नजदीक आ गए हैं तभी से वो डिप्रेशन में चले गए हैं। वाकई में बेहद ही खतरनाक होता है ये। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर फांसी कैसे दी जाती है ? इसकी प्रक्रिया क्या होती है और क्या होता है डेथ वॉरंट तो आइए जानते हैं विस्तार से।
ऐसे शुरू होती है फांसी पर लटकाने की प्रकिया
सबसे पहले तो आपको बता दें कि जिन लोगों को फांसी पर लटकाना होता है उनका सबसे पहले डेथ वॉरंट जारी किया जाता है। डेथ वॉरेंट सीआरपीसी के अंतर्गत कुछ फॉर्म्स का एक लिस्ट होता है, जो मामले की जांच, सबूतों, गवाहों और बयानों से जुड़ी होती है। इसी वारंट के फॉर्म नंबर 42 में ‘मौत की सजा का फरमान’ का जिक्र होता है, जिसे जेल प्रशासन के द्वारा जारी किए जाने के बाद दोषी को फांसी दी जाती है।

डेथ वाॉरेंट पर ‘Execution Of A Sentence Of Death’ लिखा होता है। इसके बाद पहले खाली कॉलम में उस जेल का नंबर लिखा होता है जिस जेल में फांसी दी जानी है। इसके बाद अगले कॉलम में फांसी पर चढ़ने वाले सभी दोषियों के नाम लिखे जाते है। आपको बता दें कि उसके बाद वाले खाली कॉलम में केस का FIR नंबर लिखा जाता है। उसके बाद के कॉलम में किस दिन ब्लैक वारंट जारी हो रहा है वो तारीख पहले लिखी जाती है। इसके बाद के कॉलम में फांसी देने वाले दिन यानी मौत के दिन की तारीख लिखी जाती है और किस जगह फांसी दी जाएगी यह लिखा जाता है।
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इसके बाद इस फॉर्म में साफ साफ यह लिखा होता है कि जिस-जिस को फांसी दी जा रही है उनके गले मे फांसी का फंदा जब तक लटकाया जाए जब तक की उनकी मौत न हो जाए और फांसी होने के बाद मौत से जुड़े सर्टिफिकेट और फांसी हो गई है ये लिखित में वापस कोर्ट को अवगत कराया जाए। सबसे नीचे समय दिन और ब्लेक वारंट जारी करने वाले जज के साइन होते हैं।
कौन जारी करता है डेथ वॉरंट
सबसे जरूरी बात तो यह है कि डेथ वॉरंट वही जेल जारी करता है जिस जेल में दोषी को फांसी दी जानी है। वारंट में इस बात का साफ-साफ जिक्र होता है कि किस शख्स के लिए कोर्ट के द्वारा फांसी दिए जाने का आदेश दिया गया है।

