चार दिन तक सीमेंट के नीचे पड़ा रहा मजदूर, फिर ऐसे बची जान
अगर आपको कोई कहे कि आप अपनी सांस को एक 2 मिनट तक रोक लो तो साधारण तौर पर आपकी मौत हो जाएगी लेकिन वो कहा गया है न कि –
“जाको राखे साइयां
मार सके ना कोई”
और यह कहावत चरितार्थ तब हुई जब सीमेंट की बोरियों के नीचे पड़ा रहा मजदूर 4 दिन बाद भी जीवित बच गया तो चलिए जानते हैं क्या है पूरा माज़रा…
4 दिन तक बोरियों के नीचे दबा रहा मजदूर –
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से आई मालगाड़ी के सीलबंद भोगी का दरवाजा खोला गया और उसमें से जब मजदूरों ने सीमेंट की बोरियां उतारनी शुरू की तो मजदूरों ने केवल 20 – 25 बोरियां ही उतारी थीं कि नीचे से आवाज आई – “भाई जल्दी निकालो दम घुट रहा है।”
फिर मजदूरों ने आनन-फानन में जल्दी से बोरियां हटाना शुरू किया और दबे मजदूर को बाहर निकाला हालांकि मौके पर पुलिस भी पहुंची और उसने मजदूर की स्थिति को देखते हुए कहा कि मजदूर भी बयान देने की स्थिति में नहीं है कि वह इस बोगी के अंदर कैसे पहुंचा ?
दबे हुए मजदूर की पहचान करके यह पता लगाया गया कि वह बिहार के कटिहार जिले के कोलासी गांव निवासी दीपचंद दास हैं। फिलहाल उसके घर वालों को सूचना दे दी गई है ताकि दीपचंद दास के घर वाले मौके पर पहुंच सकें।
गौरतलब है कि पुलिस ने बातचीत में बताया है कि मजदूर फिलहाल सामान्य स्थिति में आ जाए उसके बाद ही आ पता लगाया जा सकेगा कि आखिर पूरा मामला क्या है और वह एक सीलबंद बोगी के अंदर कैसे पहुंचा वह भी बोरियों के नीचे कैसे पड़ा रहा फिलहाल अभी तक यह स्थिति बिल्कुल भी साफ नहीं हो पाई है कि वह बोरियों के नीचे कैसे पहुंचा ….?

Former Desk Web Journalist – Aaj Ka Reporter
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चार दिन तक सीमेंट के नीचे पड़ा रहा मजदूर, फिर ऐसे बची जान
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यह कहावत चरितार्थ तब हुई जब सीमेंट की बोरियों के नीचे पड़ा रहा मजदूर 4 दिन बाद भी जीवित बच गया तो चलिए जानते हैं क्या है पूरा माज़रा...
Author
Somendra Singh
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India Alive
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