गुजरात निषेध अधिनियमNews 

गुजरात में दिन-प्रतिदिन नए-नए मामले उजागर हो रहे

गुजरात में उत्तर भारतीय जिसमें उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों पर नृशंस हमला हुआ । इस मामले के शांत होने के बाद अब एक नया मामला और सामने आया है । गुजरात निषेध अधिनियम और विशेष नियमों के कई धाराओं को संवैधानिक वैधता के रूप में चुनौती दी है ।
गुजरात में शराब को निजता का उल्लंघन और समानता के अधिकार के खिलाफ गौर फरमाते हुए गुजरात के हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है । इस याचिका पर हाईकोर्ट का कहना है कि वह सबसे पहले राज्य सरकार की शराब पर बैन की गई हुई पॉलिसी को विधिवत सुनेगी उसके पश्चात ही इस याचिका पर अपना कोई निर्णय देगी ।
इस याचिका में शराबबंदी का विरोध किया गया है याचिकाकर्ता ने कहा है कि शराब को बैन करना ठीक उसी प्रकार से है जिस प्रकार से मानव के प्राइवेसी का उल्लंघन करना । शराब बंद करने का तात्पर्य है कि मनुष्य के जीने का अधिकार और समाज में उसकी बराबरी के अधिकार के साथ-साथ संवैधानिक अधिकारों का गुजरात के सरकार द्वारा हनन किया जा रहा है ।
हाईकोर्ट ने शराबबंदी के खिलाफ याचिका दायर करने वाले व्यक्ति का नाम राजू पटेल है ।  उन्होंने गुजरात निषेध अधिनियम और विशेष नियमों के कई धाराओं को संवैधानिक वैधता के रूप में चुनौती दी है । उन्होंने अपनी याचिका में उल्लिखित किया कि किसी शख्स को व्यक्तिगत स्थान में भी शराब पीये जाने पर रोक लगाया गया है । उन्होंने जॉन स्टूअर्ट मिल का हवाला भी दिया है उन्होंने इस बारे में कहा कि व्यक्तिगत स्थान पर शराब का सेवन करना व्यक्तिगत कार्य  से जुड़ा हुआ है इस प्रकार से किसी और को कोई हानि नहीं पहुचता है । यह बल्कि ऐसा है जो कि सामाजिक सुरक्षा को भी खतरे में नहीं डालता  ।
याचिकाकर्ता के वकील ने गुजरात निषेध अधिनियम धारा 12 13 14 – 1 बी  को हटाने के लिए मांग की है । इस मामले में उनका कहना की धाराएं साफ तौर पर अनुचित और भेदभावपूर्ण है । इसलिए हाईकोर्ट की धाराओं को हटाया जाए क्योंकि ये धाराएं समानता के अधिकार का व्यक्तिगत रूप से उल्लंघन करती हैं । वकील ने कहा कि सरकार को इस तरह के कानून बनाने चाहिए जिससे कि इंसान अपने आप को सम्मानित और  और जीवन को अच्छी तरीके से जी सकें ।

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