जाने आखिर क्यों चंदन के पेड़ से लिपटे रहते है सांप
यूँ तो आपने कई बार किताबो में ये पढ़ा होगा कि आमतौर पर सांप चंदन के पेड़ से लिपटे रहते है। मगर क्या आप जानते है कि आखिर सांप केवल इसी पेड़ से क्यों लिपटे रहते है। जी हां यक़ीनन हम में से ज्यादातर लोग इसके पीछे की असली वजह नहीं जानते होंगे। इसलिए आज हम आपको इसके पीछे की असली वजह से रूबरू करवाएंगे। वैसे जो लोग सोचते है कि सांप को चंदन के पेड़ की महक पसंद होती है। इस वजह से वह इस पेड़ से लिपटे रहते है। तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दे कि वास्तव में ये सही कारण नहीं है। दरअसल वैज्ञानिक काफी समय पहले ही यह बात साबित कर चुके है, कि सांप में सूंघने की क्षमता नहीं होती।

चंदन के पेड़ से..
इसका मतलब ये है कि वह चंदन के पेड़ की महक को महसूस कर ही नहीं सकते। हालांकि वह अपनी जीभ को बार बार बाहर जरूर निकालते है, ताकि वह अपने आस पास के वातावरण का जायजा ले सके। वैसे आपको जान कर हैरानी होगी कि असल में सांप चंदन के पेड़ की खुशबू की वजह से नहीं बल्कि खुद को ठंडा रखने के लिए ही इस पेड़ से लिपटे रहते है। दरअसल आप में से बहुत से लोग ये बात नहीं जानते होंगे कि चंदन का पेड़ काफी ठंडा होता है। वही दूसरी तरफ सांप को ठंडी जगह पर रहना काफी पसंद होता है। जी हां सांप एक ऐसा जीव है जो गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सकता।
इसलिए अगर हो सके तो गर्मियों के दिनों में भूल कर ऐसी जगह के आस पास से न गुजरे, जहाँ सांप बसते हो। वरना ये आपके लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो खुद की चमड़ी को ठंडक पहुंचाने के लिए ही सांप चंदन के पेड़ से लिपटे रहते है। यहाँ तक कि सांप पेड़ पर केवल एक जगह नहीं, बल्कि चारो तरफ लिपट जाते है, ताकि वह पूरा समय अपने शरीर को ठंडा रख सके। बता दे कि चंदन की प्रवृति काफी शीतल होती है। इसके इलावा सांप अपने शरीर को ठंडा रखने के लिए जमीन के नीचे भी रहते है।
वैसे हम तो यही कहेंगे कि अगर आपके आस पास चंदन का पेड़ हो या बहुत सारे चंदन के पेड़ हो, तो आपको सावधान रहने की काफी जरूरत है। वो इसलिए क्यूकि कब कौन से बिल से सांप बाहर निकल कर आपके सामने आ जाएँ ये कोई नहीं कह सकता। इसलिए अगर हो सके तो अपना ध्यान रखे और चंदन के पेड़ से बच कर रहे।
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



