माँ को सच नहीं बताया और छुपा कर रखी थी बेटे की शहादत की खबर
गौरतलब है कि पुलवामा हमले के चार दिन बाद जम्मू कश्मीर में एक बड़ी मुठभेड़ हुई थी। बता दे कि इस मुठभेड़ में मेजर विभूति भी शहीद हो गए थे। हालांकि उनकी शहीदी के बारे में किसी ने भी उनकी माँ को सच नहीं बताया और उनसे यह खबर छुपा कर रखी। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दे कि मेजर विभूति के साथ चार सैनिक और भी थे। जो आंतकवादियों से बदला लेते लेते वीरगति को प्राप्त हो गए। अब इसमें तो कोई दोराय नहीं कि मेजर विभूति ने देश के दुश्मनो से जंग लड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मगर अफ़सोस कि इस जंग के दौरान वह खुद को बचा नहीं पाएं। जी हां पुलवामा के पिंलेना इलाके में आंतकवादियों से लड़ते हुए ही मेजर विभूति को गोली लग गई और वह वही शहीद हो गए।

माँ को सच नहीं बताया..
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आपको जान कर दुःख होगा कि मेजर विभूति की शादी अभी पिछले साल ही हुई थी। यहाँ तक कि उनकी शादी हुए अभी करीब छह या सात महीने का समय ही बीता था। मगर जब वह सीमा पर गए थे, तब उनकी पत्नी को भी ये मालूम नहीं था कि अब वह कभी लौट कर नहीं आएंगे। बहरहाल मेजर विभूति फ़िलहाल देहरादून में ही रहते थे। वह तीन बहनो के एकलौते भाई थे। इसके इलावा उनके परिवार में उनकी पत्नी, माँ और दादी भी है। यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो वह अपने परिवार के इकलौते चिराग थे।
हालांकि मेजर विभूति की माँ को सच नहीं बताया गया। दरअसल उनकी माँ दिल की मरीज है। यही वजह है कि उनसे यह खबर छुपाई जा रही है। मगर वो कहते है न कि देशभक्त की शहादत छुपाएं नहीं छुपती। इसके इलावा सोमवार की सुबह जब उनकी पत्नी दिल्ली अपने मायके जा रही थी, तभी उन्हें अपने पति की शहादत की खबर मिली। वही अगर उनके पिता की बात करे तो कुछ साल पहले उनका निधन हो चुका है। हालांकि अब उनकी माँ को उनके निधन के बारे में पता चल चुका है।
ऐसे में हम तो यही कहेंगे कि भगवान् मेजर विभूति की आत्मा को शांति दे और उनके परिवार को हिम्मत दे।
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



