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संविधान को शिक्षा से जोड़ने की मांग संघ के संगठन ने रखी है ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन के द्वारा संविधान को शिक्षा से जोड़ने की बात रखी जा रही है । जिसके अंतर्गत नैतिक मूल्यों की स्थापना हो सकती हैं । शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास इसके लिए नए-नए अभियान भी चलाने जा रहे हैं । साथ ही भारतीय भाषा अभियान के माध्यम से यह मुहिम चलाएंगे कि कोर्ट में फैसला जनता की भाषा के पक्ष में आ जाए ।

संविधान को शिक्षा से जोड़ने की मांग

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव अतुल कोठारी ने कहा है कि संविधान के मूलभूत कर्तव्य के बारे में सारे स्कूल में हर माध्यम पर बच्चों को इसकी पढ़ाई कराना चाहिए । हम शिक्षा के जरिए नैतिक मूल्यों का बच्चों में स्थापना कर सकते हैं । उन्होंने यह भी कहा कि अभी संविधान को शिक्षा से जोड़ने के साथ साथ कानून के छात्रों को पढ़ाया और समझाया जाता है । लेकिन शिक्षा के हर स्तर से संविधान को शिक्षा से जोड़ने अनिवार्य होता जा रहा है । उन्होंने संविधान में बदलाव कर देश का नाम सिर्फ भारत करने की मांग स्थायित्व करने की तैयारी कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि हाल ही में एक आरटीई के जवाब में गृह मंत्रालय ने कहां है कि हमारे देश का नाम इंग्लिश में इंडिया , हिंदी में भारत और उर्दू में हिंदुस्तान रखा जा चुका है । यह बहुत अचंभित करने वाला तथ्य है । संविधान में लिखा है कि इंडिया दैट इज भारत इसलिए संविधान में कुछ बातों को बदल कर यह जोड़ा जाना जरूरी है कि देश का नाम भारत है ।

संघ से जुड़ा यह भारतीय संगठन संविधान को शिक्षा से जोड़ने तथा भारतीय भाषा अभियान के नाम से कोर्ट के फैसले का स्थानीय भाषा में देने की मुहिम चलाने की तैयारी में है । अतुल कोठारी ने यह भी कहां है कि जब तक लोगों को अपनी भाषा में इंसाफ नहीं मिलेगा । तब तक वह इस मांग पर अड़े रहेंगे और इसके इंसाफ का फैसले का इंतजार करते रहेंगे । जनता के लोगों को जनता की भाषा के अनुसार इंसाफ मिलना जरूरी है । उन्होंने कहा कि अभी जिला अदालत तक अपनी भाषा में न्याय मिल गया है । लेकिन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अंग्रेजी में ही सारे फैसले चल रहे हैं । राजस्थान , यूपी , बिहार और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अंग्रेजी के साथ – साथ हिंदी में भी फैसले आ रहे हैं ।

 

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