कांग्रेस को मिला इटालियन माता जी का सहारा
कांग्रेस को मिली इटालियन माता : लोकसभा हार के बाद जब तत्कालीन राहुल गाँधी उर्फ़ पप्पू जी ने इस्तीफा दिया तो लगा कि देश की ग्रेंड ओल्ड पार्टी अब गाँधी परिवार के दास्तव से मुक्त हो जाएगी। चाटुकारो ने मिल कर महावफादार और महाचाटुकार पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोहरा को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बना डाला।
वोहरा जी के तो मानो पुरानी हसरतें जाग उठी हो। अब लग रहा था पार्टी में कुछ तो होगा भले ही एक्सपायरी डेट वाले नेता को अपना अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया हो लेकिन गाँधी परिवार के गुलाम एवं चाटूकार नेताओं ने तो जैसे खुद को अनाथ समझ लिया हो।
कांग्रेस को मिली इटालियन माता : ऐसे हुआ फुल ऑन ड्रामा CWC मीटिंग में
बेचारे भागे-भागे फिरने लगे और राहुल गाँधी बाबा से मान-मनौव्वल करने लगे जिससे यह तो साफ़ हो गया अभी पिक्चर बाकी है वह भी तगड़े से। बेचारे मोतीलाल वोहरा को शान्ति से चंद दिनों के लिए अध्यक्ष पद सँभालने नहीं दिया।
फिर क्या था कई दिन तक तो बयानबाज़ी चली जैसे किसी को कुछ पता ही न हो कि क्या होने वाला है लेकिन इतना तो साफ़ था कि ड्रामा होने वाला हैं वह भी ज़ोरदार तो फिर CWC मीटिंग का ढोंग रचा गया जहाँ घंटो की मीटिंग के बाद 5 नेताओं के ग्रुप ने इटालियन माता जी सोनिया गाँधी को याद किया और उन्हें पार्टी के अगले सत्र से पहले पार्टी का अध्यक्ष घोषित कर दिया जिसके बाद अनाथ हुए उनके चमचो की जान में जान आई आखिर माता जी का सहारा जो मिल गया था।
डॉ मनमोहन सिंह भी इतने काबिल नहीं लगे इस पार्टी को कि उन्हें ही सर्वेसर्वा बना दिया जाता आखिर वह पूर्व प्रधानमंत्री ठहरे लेकिन जब 100 % शुद्ध कांग्रेसी मोतीलाल वोहरा को तर्जी नहीं दी गई जो मरते-मरते , सब कुछ सुनने या देखने की पूर्ण अवस्था में न होते हुए भी पार्टी का बहीखाता सम्भाले जा रहे है तो मौनमोहन को कौन पहुँचेगा।
बैरहाल अब तो माता जी की एंट्री हो चुकी है सो वह भी अपने बेटे को फिर से अध्यक्ष बनवाकर रहेंगी क्योंकि यह पार्टी उनकी प्राइवेट कंपनी जो है। कांग्रेस मुक्त भारत हो गया लेकिन गाँधी परिवार मुक्त कांग्रेस के इंतज़ार की घड़ी मानो टूट से गई है , देखते हैं किस्में है दम जो इसे जोड़े।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के सोनभद्र दौरे से बढ़ी सियासी गर्मी

Web Journalist
Ex- Punjab Kesari, Bihar Express, Unacademy

