ग्रीन पटाखों के साथ मनाएं दिवाली
जब बात होती है दिवाली के त्यौहार की तो दिये, पटाखे और मिठाइयां के बिना यह त्यौहार अधूरा सा लगता है। विशेष तौर पर जब पटाखों की बात करें तो बच्चों से लेकर बुजुर्ग समुदाय भी पटाखे छुड़ाने में पीछे नहीं रहता। तमाम तरह की रंग बिरंगी छुर्छुरिया, पटाखे, अनार, चकरी आदि यह सभी हमारे त्यौहार को आकर्षक और रोचक बनाते हैं। लेकिन हम एक दिन की खुशी में यह भूल जाते हैं कि इन पटाखों से निकला हुआ प्रदूषित धुआं हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक है। जाहिर तौर पर हमें इस जहर के बारे में परिचित हैं। फिर भी ना जाने क्यों इसे नजरअंदाज कर देते हैं जो कि बहुत ही खतरनाक है। इस बार केंद्र सरकार इस जहर के स्तर को कम करने के लिए बाजार में ग्रीन पटाखों को लाई है।
जरूर देखें – अब बाजार में उपलब्ध होंगे कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखे
सरकार का दावा है कि इन पटाखों से प्रदूषण 23% तक कम होता है। केंद्रीय औद्योगिक अनुसंधान परिषद ( सीएसआईआर) की संस्था नीरी (NEERI) ने ऐसे पटाखों की खोज की है जो पारंपरिक पटाखों जैसे ही होते हैं। पर इनके जलने से और अन्य पटाखों की तुलना में प्रदूषण में 23 फ़ीसदी की कम होता है।

यह पटाखे दिखने, जलाने और आवाज में दूसरे पटाखों जैसे ही होते हैं। इन ग्रीन पटाखों को सीएसआइआर नीरी द्वारा तैयार किया गया है। साथ ही कुछ पटाखे ऐसे भी हैं जिनसे वायु प्रदूषण तो कम होगा ही और ध्वनि प्रदूषण भी कमी आएगी।
कुछ समय पहले केंद्रीय विज्ञान और औद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने सीएसआईआर में नीरी के वैज्ञानिकों के साथ इन पटाखों को एक कार्यक्रम में रिलीज किया था। सरकार ने इसके लिए क्यूआर कोड और ग्रीन लोगो भी लॉन्च किया है। जिसे इन पटाखों के डिब्बों पर प्रदर्शित किया गया है। इसकी सहायता से नकली पटाखों की जांच की जा सकती है। इस दिवाली से शुरुआत करें प्रदूषण मुक्त शहर की।

