बीएसएफ में रहकर देश की सेवा करते हुए जवान बना आईएएस ऑफिसर
दिल में जज्बा हो और कुछ भी कर गुजर जाने की हिम्मत हो तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है। दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं है जो इंसान की इच्छा शक्ति के सामने पहाड़ बनकर खड़ा हो जाएगा। इंसान अपनी इच्छाशक्ति से दुनिया के किसी भी पहाड़ को पार कर सकता है। किसी भी मुसीबत से लड़ सकता है। ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है बीएसएफ जवान हरपीत सिंह ने, जिन्होंने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स में रहकर देश की सेवा करते हुए संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी और उसमे सफलता प्राप्त की। हरपीत सिंह का यह छठा प्रयास था। इसके पहले उन्होंने चार प्रयास और किए थे। मगर उसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली थी। 2018 में दिए गए एग्जाम में उन्होंने 19 वी रैंक हासिल की।
इस तरह करते थे परीक्षा की तैयारी
हरपीत सिंह ने बताया कि कड़ी ट्रेनिंग और ड्यूटी के बाद उन्हें तैयारी के लिए बहुत समय नहीं मिल पाता था। इसलिए कम समय में तैयारी करने के लिए उन्होंने एक नया तरीका अपनाया। उन्होंने कम समय में ही सभी सब्जेक्ट के अलग-अलग विस्तृत नोट से बनाए। इससे उन्हें पढ़ाई करने में आसानी मिली।
पंजाब के रहने वाले हरपीत सिंह ने अपने पहले प्रयास 2014 में प्रीलिम्स का पेपर क्लियर कर लिया था। मगर वह उसके आगे नहीं बढ़ पाए। 2015 और 2016 में वह प्रिलिम्स और मेंस क्लियर करके इंटरव्यू तक पहुंचे। मगर वहां पर भी वह सफल नहीं हुए। 2017 में जब उन्होंने परीक्षा दी तो उन्हें देश भर में 454 वीं रैंक हासिल हुई और उन्हें भारतीय ग्रेड सर्विस में काम करने का मौका मिला। मगर उन्होंने 2018 में एक बार फिर से परीक्षा दी और इस बार उन्हें देश भर में 19 वीं रैंक हासिल हुई। हरप्रीत सिंह की पोस्टिंग भारत और बांग्लादेश के बॉर्डर पर थी। देश की सेवा करते हुए संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करना वाकई एक प्रशंसात्मक बात है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



