दोबारा कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश को लेकर भारत ने जताई नाराजगी
भारत ने जम्मू कश्मीर से उसको विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35a की समाप्ति कर दी है। इस मुद्दे पर पाकिस्तान ऐसा देश रहा हैं जो भारत के इस कदम से सबसे ज्यादा परेशान दिखाई पड़ रहा है। पाकिस्तान तो विश्व के कई देशों के पास जाकर अपना रोना रो रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर वार्ता की। जिसके बाद दोबारा उन्होंने कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश की। डोनाल्ड ट्रंप की इस पेशकश से भारत ने अपनी नाराजगी जताई है। 25 अगस्त को G7 की मीटिंग जो कि इस बार फ्रांस में होने वाली है, के दौरान अमेरिका और भारत दोनों द्विपक्षीय वार्ता में कश्मीर का मुद्दा उठा सकते हैं। भारत अमेरिका को मजबूती से यहां संदेश दे सकता है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है।
भारत ने जताई है नाराजगी
दरअसल 22 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस में होंगे। 23 और 24 अगस्त को वह यूएई और बहरीन की यात्रा पर होंगे। इसके बाद 25 अगस्त को वह फिर से फ्रांस में होंगे। इस दौरान G7 सम्मिट के बाद भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय वार्ता देखने को मिल सकती है। इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है। तीसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में कश्मीर को लेकर मध्यस्थता का राग अलापा है। जिसको लेकर भारत ने नाराजगी जताई है। भारत का कड़ा रुख पहले भी रहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है। इसमें वह किसी भी तीसरे देश का हस्तक्षेप सहन नहीं करेगा। मगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने मध्यस्थता की बात करके अपनी मंशा जाहिर कर दी है।
अन्य कई मुद्दों पर भी हो सकती है चर्चा
नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कश्मीर के अलावा द्विपक्षीय मुद्दों पर भी बात की जा सकती है। इनमें आतंकवाद को मिलकर समाप्त करने का मुद्दा भारत के प्रधानमंत्री जोर-शोर से उठा सकते हैं। पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया जा सकता है। वहीं दोनों देशों के मध्य व्यापार को और ज्यादा सुगम बनाने पर भी चर्चा की जा सकती है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



