बुरहान वानी की बरसी पर जम्मू कश्मीर पर हाई अलर्ट पर सेना
जम्मू कश्मीर में आतंकवादी हमले होते रहते हैं। ऐसे में हमारी सेना को हमेशा ही इस बात के लिए तैयार रहना पड़ता है कि आतंकियों का सामना किस प्रकार से किया जाएगा। 7 जुलाई 2016 को जब हमारी सेना ने हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी को मौत के घाट उतार दिया था। उस समय काफी समय तक कश्मीर में अस्थिरता फैल गई थी। वहां पर नियमित कामकाज ठप हो गया था। अब उस घटना के 3 साल बाद बुरहान वानी की बरसी पर एक बार फिर से खुफिया एजेंसियों ने आतंकियों द्वारा हमले करने की आशंका जताई है। जिसके लिए भारतीय सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि आतंकी हमला करने के लिए आईडी और स्नाइपर्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
हाई अलर्ट पर है भारतीय सेना
खुफिया एजेंसियों से मिली सूचना के मुताबिक आतंकवादी फरवरी में हुए जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले की तर्ज पर भी हमला कर सकते हैं। खुफिया एजेंसियों द्वारा या भी सूचना दी गई है कि आतंकी संगठनों ने बुरहान वानी की बरसी पर हमला करने के लिए विदेशी आतंकियों का एक गुट भी तैयार किया हैं। इनमें से कुछ आतंकवादी भारत की सीमा के अंदर प्रवेश भी कर चुके हैं और वह अपना नाम बदलकर कश्मीर में ही आसपास के इलाकों में रह रहे हैं। सुरक्षाबलों द्वारा नेशनल हाईवे पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
जम्मू कश्मीर में इस समय अमरनाथ यात्रा भी चल रही है। ऐसे में सुरक्षा बलों की चुनौतियां और भी बढ़ जाती हैं क्योंकि यदि अमरनाथ यात्रियों पर किसी भी तरह का हमला होता है तो देश के अंदर काफी अस्थिरता फैल जाएगी। हमारे सुरक्षा बल लगातार कश्मीर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ कर उन्हें मौत के घाट उतारते रहते हैं। इसके साथ ही वह आतंकवादियों के घर वालों को समझा कर यह प्रयास करते हैं कि आतंकवादी सही रास्ते पर वापस आ जाएं।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



