गुजरता साल
आंखें खुली तो कुछ उदासी सी थी,
किसी के जाने की आहट दरवाज़े पे थी।
जो नज़र घुमाई कैलेंडर की तरफ,
इकत्तिस दिसंबर तारीख लिखी थी।
कंधे पर मोटी पोटली बंधी थी,
जाने कितनी यादें बक्से में भरी थीं।
यू हीं नहीं बीता है ये साल,
खुशी ने गमों से दोस्ती जो की थी।
कुछ पलों की यादें तो ऐसी सी थीं,
मानो कुछ ही मिनट में पूरी ज़िन्दगी सी थीं,
यारों का संग इतना था हसीं,
की गमों की याद आयी ही नहीं।
कितना कुछ गुज़रा है,
इस गुजरते साल में।
अपनों को फिसलते देखा है,
अपने बुरे हाल में।
हंसते – गाते रोते – मुस्काते,
दिल बहलाते हमको फुसलाते।
दबे पांव ही निकल गया ये,
हम सबको ठेंगा दिखलाके।
चलो छोड़ के आयें कुछ दूरी तक,
मेहमान बनी इन यादों को।
उन्नीस के लिए तैयारी करें,
अलविदा कहें अठ्ठारह को।

