अपनी जिंदगी से केवल 2 मिनट निकाल कर इस कहानी को एक बार जरूर पढ़े
आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताने वाले है, जिसे पढ़ने के बाद आपके जीवन को यक़ीनन एक नयी दिशा मिलेगी. जी हां दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे होते है, जो अपने जीवन का सही उद्देश्य समझ पाते है. इसलिए अगर आप अपने जीवन का सही उद्देश्य समझना चाहते है तो अपनी जिंदगी से केवल 2 मिनट निकाल कर एक बार इस कहानी को जरूर पढ़े. हमें यकीन है कि इस कहानी को पढ़ने के बाद आपका जीवन को देखने का नजरिया भी बदल जाएगा. गौरतलब है कि अगर आप अपनी जिंदगी से केवल 2 मिनट निकाल कर इस कहानी को सुकून से पढ़ेंगे तो आपको यह कहानी काफी दिलचस्प लगेगी. तो चलिए अब आपको इस कहानी से विस्तार से रूबरू करवाते है.
अपनी जिंदगी से केवल 2 मिनट निकाल कर इस कहानी को जरूर पढ़े..
एक समय की बात है. एक गांव में एक गुरु और उनका शिष्य दोनों रहते थे. गौरतलब है कि गुरु का जो शिष्य था, वह वास्तव में काफी आलसी था. जी हां शिष्य अक्सर ही सोता रहता था. वही दूसरी तरफ गुरु के पास एक पत्थर था. जिसे वह जब भी किसी लोहे की चीज पर रगड़ता था तो वह चीज सोने की बन जाती थी. यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो गुरु और शिष्य दोनों में जमीन आसमान का अंतर था. बहरहाल एक बार गुरु जी को किसी काम से बाहर जाना पड़ा. ऐसे में गुरु जी ने अपने शिष्य से कहा कि अब वह एक दिन के बाद ही वापिस आएंगे. मगर इस दौरान तुम्हे बाजार से लोहा ला कर उसे सोने में बदलना है.
गुरु ने शिष्य को सिखाया पाठ..
बता दे कि इतना कहने के बाद गुरु जी ने वह पत्थर अपने शिष्य को संभाल कर रखने के लिए दे दिया. गौरतलब है कि गुरु जी के जाने के बाद शिष्य ने सोचा कि अभी उसके पास काफी समय है. जी हां शिष्य ने सोचा कि उसे केवल दुकान तक ही तो जाना है. फिर जब अगला दिन शुरू हुआ तो शिष्य ने सोचा कि अभी सुबह ही तो हुई है, वो बाद में दुकान पर जाएगा. मगर दोपहर का खाना खाने के बाद शिष्य को नींद आ गई. यहाँ तक कि शिष्य के आलस्य के कारण उसका एक दिन ऐसे ही व्यर्थ में निकल गया.
फिर अगले दिन उसे याद आया कि उसे तो लोहा लाने के लिए दुकान पर जाना था. हालांकि जैसे ही वह जल्दबाजी में लोहा लाने के लिए दरवाजे के बाहर गया, वैसे ही उसे सामने गुरु जी खड़े दिख गए. जी हां गुरु जी ने कहा कि लाओ भाई मेरा लोहा कहा है. बहरहाल गुरु के लोहा मांगने के बाद उनका शिष्य इतना ज्यादा शर्मिंदा हुआ कि इस घटना के बाद उसने अपना सारा आलस्य ही छोड़ दिया.
वैसे इस कहानी से हमें यही सबक मिलता है कि अगर हम बहुत समय पड़ा है कह कर किसी काम को टालते रहेंगे तो वह काम कभी पूरा नहीं होगा. इसलिए अगर हो सके तो जीवन से आलस्य को निकाल कर बाहर फेंक दे. वैसे हम तो यही कहेंगे कि हर इंसान को अपनी जिंदगी से केवल 2 मिनट निकाल कर इस कहानी को जरूर पढ़ना चाहिए.
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



