राम मंदिरहिन्दी लेख 

अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद की विध्वंस की पूरी कहानी

राम मंदिर और बाबरी मस्जिद

अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का विवाद लगभग 500 साल पुराना है| और इस मसले पर अक्सर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होती रहती है|

आज से लगभग 490 साल पूर्व 1528 ई. में अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया| हिन्दू का कहना है कि जिस जगह पर मस्जिद का निर्माण किया गया है वह पर पहले राम मंदिर हुआ करता था| क्योंकि अयोध्या भगवान राम की जन्म भूमि है|

राम मंदिर

विध्वंस

हिंदुओं और मुस्लिमों में पहली हिंसा 1853 ई. में इस आरोप में हुई कि राम मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाया गया है | फिर 1569 में अंग्रेजी सरकार ने भूमि के अंदर और बहार मुस्लिमों और हिंदुओं को अलग-अलग प्रार्थना की इजाज़त दे दी। 1885 ई. में पहली बार अदालत में मस्जिद से सटे मंदिर बनाने की मांग की गयी| 23 दिसंबर 1949 में करीब 50 हिंदुओं ने मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति रख दी| और हिंदू नियमित रूप से पूजा करने लगे|

16 जनवरी 1950 में गोपाल सिंह विशारद ने अदालत से रामलला की पूजा-अर्चना की इजाज़त मांगी| उसी साल 5 दिसंबर को बाबरी मस्जिद में राममूर्ति रखने के लिए महंत परमहंस रामचंद्र दास ने मुकदमा दायर किया गया| उस दिन से मस्जिद को ढांचा नाम से जाना जाने लगा|

17 दिसंबर 1959 विवादित स्थल को हस्तांतरित करने के लिए निर्मोही अखाड़ा के द्वारा मुकदमा दायर किया| 1961 में मालिकाना हक़ के लिए फिर मुकदमा दायर किया गया| विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने 1984 में बाबरी मस्जिद का ताला खोलने और भव्य राम मंदिर का निर्माण की नीव रखी| फिर एक समिति का गठन हुआ|

1 फरवरी 1986 को फ़ैजाबाद जिला न्यायालय ने विवादित स्थल में हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति दे दी| जवाब में मुस्लिमों ने भी एक समिति का गठन किया गया| 1989 में भाजपा ने हिंदुओं का साथ दिया| फिर 1 जुलाई 1989 को पांचवा मुकदमा दाखिल किया गया|

रथ यात्रा

बाबरी मस्जिद के नजदीक शिलान्यास की इजाजत तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दी।  सितंबर 1990 लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली, फिर सांप्रदायिक दंगे हुए| उसके बाद बिहार में आडवाणी जी गिरफ्तार भी हुये|

सबसे बड़ा विवाद 6 दिसंबर 1992 को कार सेवको ने अयोध्या पहुचकर बाबरी मस्जिद ढाह दिया। फिर सांप्रदायिक दंगे हुए| और फिर एक अस्थायी राम मंदिर का निर्माण हुआ| विवाद को सुलझाने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों से बातचीत करने के लिए प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक अयोध्या विभाग शुरू किया| भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की| उनका दावा था कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले हैं। कुछ  बात से सहमत थे तो कुछ नहीं|

2003 में मस्जिद विध्वंस को उकसाने वाले सात हिंदू नेताओं को अदालत में बुलाया गया|

2009 में लिब्रहान आयोग के द्वारा 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को रिपोर्ट सौंपा गया| 30  सितंबर 2010 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा निर्मोही अखाड़ा| 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दिया| 2016  में सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का निधन हुआ|

21 मार्च 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने आपसी विवाद से मामला सुलझाने की बात कही| 21 अप्रैल 2017 को  ने लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित बीजेपी आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केश चलाने को कहा| उसके बाद से छोटे छोटे फैसले होते रहते है|

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