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विश्व गौरेया दिवस

जैसा कि, हम सभी जानते हैं कि विश्व गौरेया दिवस (world sparrow day) हरेक साल 20 मार्च को मनाया जाता है। यह एक चिंता का विषय बनते जा रहा है, कि आज से 20-25 साल पहले हमारे घर आँगन में फुदकने वाली गौरेया अब शहरों में ही नहीं, गावों में भी नहीं नजर आती है। एक वक्त था जब हमारे कानों में सुबह की पहली किरण के साथ ही बहुत मीठी-मीठी आवाजें सुनाई पड़ती थी। यें आवाजें गौरेया की होती थी। पेड़-पौधें की संख्या में लगातार कमी होना,मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगें, अनलेडेड पेट्रोल के इस्तेमाल से निकलने वाली जहरीली गैस ये सब, गौरैयों एवं अन्य परिंदों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। एक आंकड़ें के मुताबिक अब सिर्फ 20 फीसदी ही इनकी आबादी रह गयी है।

गौरैयों की संख्या में लगातार कमी होने की वजहें:-
पहले अक्सर हमारे घरों में गौरेया उड़ा करती थी। फिर हमारे छतों पर सीलिंग फैन लग गए। हमारी यह सुविधा इस प्यारी सी पक्षी के घातक सिद्ध होने लगी। घरों में बेफिक्री से परवाज भरने वाली गौरैया फैन से टकरा-टकरा कर मरने लगी। गावों में आज भी आँगन है। लेकिन, शहरों में ये खत्म होने लगे। पहले दाना चुगने ये आँगन में आया करती थी। लोग छोटे बर्तनों में इनके लिए दाना और पानी रखते थे। लेकिन आज के भागदौड़ वाली जिंदगी में किसी के पास भी इनके लिए वक्त नहीं है। एक रिसर्च के अनुसार, मोबाइल टावर की बढ़ती संख्या भी गौरैयों की आबादी कम होने के पीछे जिम्मेदार है। दरअसल, ऐसा दवा है कि इन टावर्स से जो तरंगें निकलती हैं, वो गौरैयों की प्रजनन क्षमता को कम करती है।

हमें क्या करना चाहिए?
हम फिर से गौरैयों की चहचहाहट को सुन सकते हैं। हमारी सुबह फिर से खूबसूरत हो सकती है। लेकिन, कैसे? चलिए जानते हैं कुछ उपायों को जो शायद हमें हमारे आँगन की नन्हीं सी परी को लौटा सकती है:-
हमें घरों में कुछ ऐसे झरोखे रखने चाहिए जहाँ गौरेया घोंसले बना सकें। छत और आँगन पर अनाज के दाने बिखेरने चाहिए। घर की मुंडेर पर मिट्टी के बर्तन में पानी रखने चाहिए। आँगन और छतों पर पौधें लगाने चाहिए ताकि पक्षी आकर्षित हो।

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