लखनऊ मदरसा शारीरिक शोषण काण्ड के बाद कानून तय करे धर्म के ठेकेदारों की परिभाषा!
लखनऊ के मदरसे में यौन शोषण मामला धार्मिक और मजहबी भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण है कहने को इससे पहले भी धार्मिक और मजहबी भ्रष्टाचार के मामले समय समय पर उजागर होते रहे है और इलेक्ट्रॉनिक मिडिया ने भी ऐसे सभी मामलो को अपनी टी आर पी बढ़ाने या यूं कहे की अपनी दुकानदारी चमकाने के लिए डेंटिंग पेंटिंग करके समाज के सामने उजागर करने का कार्य भी किया साथ ही अपने केमरो के माध्यम से धर्म और मजहबी गुरुओ के शौचालय से लेकर शयन कक्ष तक का लाइव प्रसारण भी किया लेकिन अफ़सोस कि किसी भी न्यूज़ चैनल ने ऐसे किसी भी भ्रष्टाचार के खात्मे पर चर्चा नहीं की और साथ ही महिला अधिकारों के लिए बात बात पर तख्ती लेकर सड़क से संसद तक हल्ला मचाने वाले किसी भी सामाजिक संगठन ने ऐसे पाखंडी धर्म और मजहबी गुरुओ की दुकानों पर निगरानी रख इनके शुद्धि करण के लिए सरकार से विशेष कानून बनाने की मांग को लेकर आज तक न कोई तख्ती उठाई और न ही कोई आवाज उठाई और न ही कोई आंदोलन किया सायद ये सामाजिक संगठन भी इलेक्ट्रॉनिक मिडिया की तरह ही टी आप पी बढ़ाने व् अपनी दुकानदारी चमकाने के लिए किसी मासूम के साथ हुए बलात्कार का इंतिजार कर रहे होते है !
क्योकि समाज के इन सभी ठेकेदारों को न तो जुर्म करने वाले से कुछ लेना देना होता है और न ही जुर्म के शिकार मासूमो से …इन्हे केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करना होता है और आज जरुरत है ऐसे सभी ठेकेदारों से दूरी बनाकर आत्मगिलानी पूर्ण घटनाओ पर आत्ममंथन कर अन्धविश्वास और पाखंड से मुक्ति के लिए उचित कदम उठाने की ….ऐसी आत्मगिलानी पूर्ण घटनाओ के खात्मे के लिए निम्न उपाए जरूर अपनाये
(1) सुबिधाओ का भोग करने वाले किसी भी धार्मिक गुरु व् मजहबी मौलबी को अपना गुरु व् मार्गदर्शक न बनाये क्योकि सुबिधाओ का भोग करने वाला कोई पाखंडी संत पाखंड का रास्ता तो दिखा सकता है लेकिन ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता बताने में हमेशा असमर्थ ही रहता है
(2) जो कर्म से मिल सकता है वो पाखंड से कभी नहीं मिल सकता रावण भी पाखंड व् मायावी शक्तियों का स्वामी था पर जीत कर्म को ही अपना ईश्वर मानने वाले राम की हुई इसलिए किसी पर अन्धविश्वास करने से लाख गुना बेहतर विकल्प है खुद पर व् खुद की क्षमताओं पर विश्वास करना
(3)आपका ईश्वर आपकी आत्म शक्ति में ही समाहित होता है इसलिए ईश्वर को प्राप्त करने के लिए किसी पाखंडी मजहबी मौलबी मौलाना व् धर्म गुरु की शरण में न जाकर कर स्वयं की शरण में जाए क्योकि आत्मीय ज्ञान से बड़ा कोई भी ज्ञान इस संसार में उपलब्ध ही नहीं है



