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मोदी सरकार की नई रणनीति ने तोड़ी नक्सलियों की कमर, सिमट रहा है रेड कॉरिडॉर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में आतंकवाद के खिलाफ भारत सरकार की नई रणनीति कारगर सिद्ध हो रही है। गत वर्ष गृहमंत्री ने नकसल आतंकवाद से निबटने के लिए नई योजना SAMADHAN का आरंभ किया था। राजनाथ सिंह ने SAMADHAN रणनीति का विस्तार इस प्रकार बताया था:

S-smart leadership,
A-aggressive strategy,
M-motivation and training,
A-actionable intelligence,
D-dashboard-based KPIs (key performance indicators) and KRAs (key result areas),
H-harnessing technology,
A-action plan for each threat and
N-no access to financing

इस नई रणनीति के कारण नक्सल आतंकवाद से प्रभावित जिलों की संख्या में काफी गिरावट आई है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015 में जहां 75 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहीं इस साल इन जिलों की संख्या कम होकर मात्र 58 रह गयी है।

नक्सल आतंक के खिलाफ अपनाई जा रही इस नई रणनीति में खुफिया सूचना इकट्ठा करने के लिए ड्रोन जैसे आधुनिक तकनीक का सहारा लेना, सुरक्षाकर्मियों की ट्रेनिंग मोटिवेशन और उनके द्वारा दिन-रात ऑपरेशन्स शामिल हैं। इस नई रणनीति की वजह से अब सुरक्षाबल जंगल के काफी अंदर तक माओवादियों को निशाना बना रहें हैं।

सीआरपीएफ के महानिदेशक राजीव राय भटनागर ने बताया कि नई रणनीति अपनाने के बाद हथियार, पैसे और वरिष्ठ नक्सल कमांडरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की नक्सलियों की क्षमता में काफी गिरावट आई है।

भटनागर ने आगे कहा कि नक्सल आतंकवाद अब केवल तीन इलाकों में ही प्रभावी रह गए हैं। ये हैं बस्तर-सुकमा का 1200 किलोमीटर का इलाका, आंध्र प्रदेश-ओडिशा सीमा का 2000 किलोमीटर का क्षेत्र और 4500 किलोमीटर के दायरे में फैला अबूझमाड़ का जंगल। अन्य जगहों से इनका प्रभाव समाप्त हो गया है।

नई रणनीति अपनाने के बाद वर्ष 2017 में 150 से ज्यादा माओवादी आतंकी मारे गए हैं। पिछले साल सुकमा में 25 सीआरपीएफ जवानों की हत्या के बाद मई में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भेंट की थी। और इस मीटिंग के बाद ही माओवादियों से निपटने की नई रणनीति अपनाई गई थी।

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