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भ्रष्टाचारी भैंस को हाँक रही लालू की जातिवादी लाठी

भ्रष्टाचारी  भैंस को हाँक रही लालू की जातिवादी लाठी…. जी हा अगर गुजरे हुए कल या वर्तमान राजनीति की बात करे तो इस कथन का स्पष्टीकरण आसानी से किया जा सकता है क्योकि भारत एक ऐसा देश है जहाँ लोकतंत्र के मंदिर मे विराजमान जनता के नेता (देवता) इसलिए विराजमान नही है कि वो एक ईमानदार व कर्तव्य निष्ठ व्यक्ति के चरित्र को धारण करते है बल्कि इसलिए विराजमान है क्योकि वो एक जातिवादी चरित्र के रूप मे ….अपने अपने क्षेत्र के लोकतांत्रिक मंदिरो मे देवता के रूप मे पूजे जाते है ।

ठीक यही हाल आज बिहार मे लालू प्रसाद यादव का है चारे घोटाले सहित कई घोटालो मे  विलन का रोल निभा चुके लालू जातिवाद की फिल्म मे मेंन हीरो के किरदार मे दिखाई देते है या हम यूँ कहे कि विहार मे जातिवादी लोग उन्हें अपना देवता मान चुके है ।

लेकिन इन सभी जातिवादी लोगो की मानसिकता एक लोकतांत्रिक देश की प्रतिष्ठा पर प्रश्न चिन्ह लगाने को मजबूर करती है और अहसास कराती है कि आज़ादी के बाद जो लोकतंत्र का गिफ्ट पेक (उपहार मे दिया गया तोहफा) हमारे हाथो मे थमाया गया वो ऊपर से तो काफी चमकदार था लेकिन जैसे ही उस गिफ्ट पेक को खोला गया तो खोखलेपन और खालीपन का अहसास के सिवा उसमे कुछ भी नही था ।

भारत देश के लोगो के साथ एक ही समस्या है कि वो आँखे बंद करके किसी भी पत्थर को अपना भगवान मान लेते है और आँखे बंद करके आंखो मे धूल झोंकने वाले किसी पाखण्डी साधु को अपना गुरु मान लेते है और यही हाल आज देश की राजनीति का है जातिवादी लोग आज नही देखते कि जिसको वो अपना नेता चुन लोकतंत्र के मंदिर मे विराजमान करने जा रहे है वो अपने देश ,अपने नगर ,अपने गांव ,के विकास कार्यो के प्रति ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ है कि नही उनके लिए तो बस इतना ही काफी है कि वो नेता विशेष उनकी जाति पंथ व मजहब का है उनकी इस भेड़ चाल का परिणाम ये होता है कि जातिवादी नेता अपने आप को इनका भगवान समझने लगता है और अपने पीछे अंधभक्तो की लंबी कतार तैयार कर…आश्रय देने वाले लोकतंत्र के मंदिर के सामने ही खड़ा होकर लोकतंत्र को ही ललकारने लगता है ।

कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया आज लालू प्रसाद के द्वारा देश के लोकतंत्र को मिल रही है लालू प्रसाद ये भली भाँति समझते है कि उनके पीछे जातिविशेष का अपार समर्थन है जिसके  दम पर वो देश की कानून व्यवस्था और लोकतंत्र को ठेंगा दिखा भ्रष्टाचारी  रूपी भैंस को निरंतर जातिवादी लाठी से हाँकते जा रहे है !

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लेख अंत मे मेरा आप एक ही निवेदन है 
हमारी आपकी पहचान किसी जाति ,धर्म ,मजहब से नही बल्कि एक राष्ट्र हिन्दुस्तान से है इसलिए किसी जाति धर्म मजहब ठेकेदारो के पदचिन्हों पर चलकर राष्ट्र को खोखला करने का कार्य न करे ….धन्यवाद

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