क्या आप जानते हैं कि हमारे तिरंगे का निर्माण किसने किया था?
जी, हाँ, क्या आपको पता है कि हमारे देश का झंडा जो तीन रंगों के मेल से बना है, उसकी डिज़ाइन किसने तैयार की थी? हमारे तिरंगे का निर्माण कोई और नहीं बल्कि आंध्रप्रदेश के पिंगली वेंकैया थे। वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उनका जन्म 2 अगस्त 1876 को आंध्रप्रदेश के कृष्णा जिले में मछलीपट्टम में हुआ था। वह तेलुगु ब्राह्मण कुल से थे। राष्ट्र ध्वज बनाने के बाद पिंगली वेंकैया झंडा वेंकैया के नाम से विख्यात हो गए।
शिक्षा
मछलीपट्टम से हाई स्कूल पास करने के बाद वो अपनी आगे की पढ़ाई पूरा करने के लिए कोलम्बो चले गए। वापस भारत लौटने पर उन्होंने एक रेलवे गार्ड के रूप में और बेल्लारी में सरकारी कर्मचारी के रूप में बतौर काम किया। और फिर बाद में वो एंग्लो वैदिक महाविद्यालय में उर्दू और जापानी भाषा का अध्ययन करने के लिए लाहौर चले गए।
वेंकैया कई विषयों के ज्ञाता थे, उन्हें भू-विज्ञान और कृषि क्षेत्र में भी विशेष लगाव था। वह हीरो की खदानों के विशेषज्ञ थे। उन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में भी सेवा की थी और दक्षिण अफ्रीका के एंग्लो-बोअर युद्ध में भाग लिया था। यही वो गाँधी जी के संपर्क में आये और उनकी विचारधारा से बहुत प्रभावित हुए।
1906 से 1911 तक पिंगली मुख्य रूप से कपास की फसल की विभिन्न किस्मों के तुलनात्मक अध्ययन में व्यस्त रहे और उन्होंने बॉम्वोलॉर्ट कम्बोडिया कपास पर अपना एक अध्ययन प्रकाशित किया। वह पट्टी वेंकैया (कपास वेंकैया) के नाम से प्रचलित हो गए।
गाँधी जी से मुलाकात
1899 से 1902 के बीच दक्षिण अफ्रीका के “बायर” युद्ध में उन्होंने भाग लिया। इसी बीच वहां पर वेंकैया साहब की मुलाकात महात्मा गाँधी से हो गई। उनके विचारों से वो काफी प्रभावित हुए और स्वदेश वापस लौटने पर बम्बई में गार्ड की नौकरी पर लग गए।
इसी बीच मद्रास में प्लेग नामक महामारी के कारण कई लोगों की मौत हो गई, जिससे उनका मन व्यथित हो उठा और उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी। वहां से मद्रास में प्लेग रोग निर्मूलन इंस्पेक्टर पद पर तैनात हो गए।
तिरंगे का निर्माण
1916 में पिंगली वेंकैया ने एक ऐसे ध्वज की कल्पना की जो पुरे देशवासियों को एक सूत्र में बांध दे। उनके इस पहल को एस. बी. बोमान जी और उमर सोमानी जी का साथ मिला और इन तीनों ने मिलकर नेशनल फ्लैग मिशन का गठन किया। वेंकैया जी ने राष्ट्रीय ध्वज के लिए महात्मा गाँधी से सलाह ली और गाँधी जी ने उन्हें इस ध्वज के बीच में अशोक चक्र रखने की सलाह दी जो संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का संकेत बने। तिरंगे का निर्माण
पिंगली वेंकैया लाल और हरे रंग के पृष्ठभूमि पर अशोक चक्र बनाकर लाए लेकिन गाँधी जी को यह ध्वज वैसा नहीं लगा जैसा वो चाहते थे। राष्ट्रीय ध्वज में रंग को लेकर तरह-तरह के वाद-विवाद चलते रहे।
अखिल भारतीय संस्कृत कांग्रेस ने 1924 में ध्वज में केसरिया रंग और बीच में गदा डालने की सलाह इस तर्क के साथ दी कि यह हिन्दुओं का प्रतीक है। किसी ने गेरुआ रंग डालने का विचार इस तर्क के साथ दिया कि ये हिन्दू, मुस्लिम और सिख तीनों धर्मों को व्यक्त करता है।
काफी तर्क वितर्क के बाद भी जब सब एकमत नहीं हो पाए तो 1931 में अखिल भारतीय कांग्रेस के ध्वज को मूर्त रूप देने के लिए 7 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई। इसी साल कराची कांग्रेस कमेटी की बैठक में पिंगली वेंकैया द्वारा तैयार ध्वज, जिसमे केसरिया, सफेद और हरे रंग के साथ केंद्र में अशोक चक्र स्थित था, को पूर्ण रूप से सहमति मिल गई। इसी ध्वज के तले आजादी के परवानों ने कई आंदोलन किए और 1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
मृत्यु
तिरंगे का निर्माण के बाद पिंगली वेंकैया “झंडा वेंकैया” के नाम से प्रचलित हो गए। 4 जुलाई, 1963 को उनकी मृत्यु हो गई।
Writer at India Alive

