कविता शायरी 

ऐ ज़िन्दगी! क्या खूब है तू

ऐ ज़िन्दगी ! क्या खूब है तू,

खिलाड़ी मैं और खेल है तू।

 

खेल इतना खौफ है तेरा ,

अंत जिसका मौत है मेरा।

अब खेल ऐसा खेलना है,

हार कर भी जीतना है।

 

इस खेल का भी क्या दस्तूर है,

ना नियम , बस फितूर है।

जिसमें मंज़िल तो सबकी एक है,

पर रास्ते अनेक हैं।

 

बहुत दूर चला गया हूँ,

तेरे खेल खेलते–खेलते,

की अब बस थक गया हूँ,

तेरे ज़ख़्म झेलते–झेलत।

 

रूठ गयें हैं बहुत से अपने,

छूट गयें हैं बहुत से सपने।

पर ये समय है कि रुकता नही,

ओर दिल है कि सम्भलता नही।

 

पर मैं भी एक खिलाड़ी हूँ, ऐ खेल!

जीतना जिसकी फितरत में है,

कुछ ख्वाहिशें ही तू टूटी हैं,

हसरतें तो अभी भी हैं।

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8 Thoughts to “ऐ ज़िन्दगी! क्या खूब है तू”

  1. Kritilekha

    Hey…..nice poetry!!! Keep it up dude?

  2. Jivnesh tyagi

    Full off enjoyed life

  3. Jivnesh tyagi

    Awesome poerty

  4. Juhi Garg

    Awesome!!! Its amazing depecting truth of life?

  5. Sonam Kharwar

    Thankyou so much people:)

  6. Umang kaler

    Real truth ?

    1. Sonam Kharwar

      Thank you Umang

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