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भारत-बंद के दौरान हिंसा, मारपीट और आगजनी

हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने दलित-उत्पीड़न एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए डीएसपी स्तर के जांच का प्रावधान कर दिया था। हालांकि यह केवल दलित-उत्पीड़न एक्ट का दुरुपयोग रोकने के लिए आवश्यक था, फिर भी राजनैतिक पार्टियों ने दलित वोट बैंक को पाने के लिए इसका विरोध शुरू कर दिया। इससे उत्साहित हो कर सभी दलितवादी संगठनों ने आज भारत बंद का ऐलान किया है।

इन दलित संगठनों ने शांतिपूर्ण भारत बंद की बात कही थी। लेकिन भारत बंद के समर्थकों ने बंद को सफल बनाने के लिए लोगों के साथ मारपीट, गाड़ियों में आगजनी और रेल रोको आदि हिंसात्मक कार्य भी कर रहे हैं।

बंद समर्थकों ने मध्य प्रदेश में फ़ाइरिंग की, उत्तर प्रदेश में बसों और कारों को आग के हवाले कर दिया। सवारियों पर पत्थर फेंके गए।

मेरठ में डीएम के घर पर पथराव किया गया। जयपुर में आम यात्रियों की गाडियाँ तोड़ी गई। यहाँ तक कि बंद समर्थकों ने आज यात्रा कर रही महिलाओं और बच्चों तक को भी नहीं छोड़ा। कई लोगों को गंभीर चोटें आई।

भारत बंद समर्थकों द्वारा हिंसा पर गृहमंत्री ने शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में रिवियू पिटिशन रही है। सभी लोग शांति बनाएँ रखें।

अभी तक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार से हिंसा के घटनाओं कि खबरें आ रही है। अब देखना यह है कि शाम तक यह हिंसक भारत बंद कितना शांत हो पता है और कितना प्रभाव डालता है।

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