कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में हाई कोर्ट में अपील करेगी योगी सरकार
करीब एक दशक पहले हुए कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में 1 दिन पहले सीबीआई की विशेष अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए और पर्याप्त सबूत ना मिल पाने के कारण बाहुबली मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी को बरी कर दिया। सीबीआई की विशेष अदालत ने जैसे ही इन लोगों को बरी करने का आदेश दिया वैसे ही कृष्णानंद राय के समर्थक और उनके रिश्तेदारों के साथ-साथ भाजपा नेताओं में भी खलबली मच गई। अब सीबीआई अदालत द्वारा दिए गए इस फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हाई कोर्ट में अपील करने का फैसला किया है।
14 साल पहले हुई थी कृष्णानंद राय हत्याकांड की घटना
बुधवार को जब सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी के साथ-साथ अन्य आरोपियों को बरी किया तो 29 नवंबर 2005 को 14 साल पहले हुई उस घटना की याद लोगों के जेहन में ताजा हो गई। दरअसल 14 साल पहले 29 नवंबर 2005 को गाजीपुर में पूर्व विधायक कृष्णानंद राय सहित छह अन्य लोगों की एके-47 से ताबड़तोड़ गोलियां बरसा कर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में 400 राउंड गोलियां चली थी। इसमें सीधे तौर पर मुख्तार अंसारी का नाम आया था। हालांकि मुख्तार अंसारी उस समय जेल में बंद था। मगर उसके बावजूद उसे साजिश रचने का आरोपी बनाया गया था।
यह था पूरा मामला
दरअसल 2002 में गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से बीजेपी की तरफ से कृष्णानंद राय को उम्मीदवार बनाया गया था। जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई थी। उसके बाद पूर्वांचल के माफिया कहे जाने वाले मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद के बीच दुश्मनी बढ़ने लगी। उत्तर प्रदेश की टास्क फोर्स ने राय को आगाह किया था कि उनकी हत्या का प्रयास हो सकता है। इसी दौरान एक समारोह से लौटते वक्त कुछ हथियारबंद लोगों ने ऑटोमेटिक गन और एके-47 से काफिले पर हमला कर दिया। मुखबिरी इतनी सटीक थी कि बदमाशों को यह पता था कि विधायक अपनी बुलेट प्रूफ गाड़ी में नहीं हैं। इस दौरान 7 लोगों की हत्या हुई थी और उनके शरीर से 67 गोलियां बरामद की गई थीं। इससे पूरे यूपी और बिहार में हड़कंप मच गया था। वर्तमान समय में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उस समय इसके लिए धरने पर बैठे थे।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
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