क्या वास्तव में भारत 2025 तक हासिल कर पाएगा 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनामी का लक्ष्य ?
देश में दूसरी बार नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण और फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट के दौरान 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनामी का शब्द कई बार प्रयोग किया गया। हाल ही में बजट पेश करने के बाद मोदी सरकार के सभी मंत्री 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनामी का जाप कर रहे हैं। मगर क्या यह लक्ष्य 2025 तक भारत हासिल कर पाएगा। एक ऐसे समय में जब देश में बेरोजगारी 45 सालों में सबसे शीर्ष पर है। उद्योगों की रफ्तार थम चुकी है। देश की अर्थव्यवस्था की अनुमानित दर घटाकर 7 फ़ीसदी कर दी गई है। ऐसे में क्या यह लक्ष्य हासिल कर पाना संभव हो पाएगा?
आसान नहीं है यह लक्ष्य…
वर्तमान समय में भारत देश की अर्थव्यवस्था 2.7 ट्रिलियन डॉलर की है। एक रिपोर्ट में आईएमएफ ने यह दावा किया है कि 2024 तक भारत 4.7 ट्रिलियन इकोनामी वाला देश बन सकता है। मगर मोदी सरकार ने 2025 तक जो लक्ष्य रखा है उसे प्राप्त करना आसान नहीं है। देश में अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और औद्योगिक विकास को तेजी से बढ़ाना होगा। वही देश में काफी मात्रा में रोजगार पैदा करना होगा ताकि लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ेगी। इसके साथ-साथ विकास दर को 8 फ़ीसदी के साथ लेकर आगे चलना पड़ेगा। तब जाकर कहीं 2025 तक यह लक्ष्य हासिल हो पाएगा।
देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार ने वित्तवर्ष 2019-20 के बजट में 100 बिलियन डॉलर निवेश करने की बात कही है। वहीं यह लक्ष्य 2030 तक 50 लाख करोड़ का हो जाएगा। 5 जुलाई को पहली बार किसी महिला वित्त मंत्री द्वारा देश का पूर्णकालिक बजट संसद में पेश किया गया। इस बजट में देश की विकास दर 7 फ़ीसदी किधर से बढ़ने का अनुमान जताया गया है जो कि नरेंद्र मोदी सरकार के लक्ष्य को पाने के लिए काफी नहीं है। ऐसे में सरकार को विकास दर बढ़ानी होगी।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



