राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा की वापसी तय – प्रमुख वजहें जिसकी वजह से राजस्थान में भाजपा की स्थिति मजबूत होती दिख रही
मतदान का दिन 7 दिसंबर के नजदीक आने के साथ ही राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा का पलड़ा भारी होता जा रहा है, और कांग्रेसी जीती बाजी हारने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और वसुंधरा राजे का धुंआधार प्रचार रंग ला रहा है।
राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा की वापसी तय – जानिए प्रमुख वजह
1. भाजपा का शीर्ष नेतृत्व और संगठन पूरी ताकत से राजस्थान अभियान में लगना : राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पूरे दमखम से अपनी ताकत लगा रहा है इसमें पार्टी अध्यक्ष अमित शाह स्वयं प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सहित सभी बड़े नेताओं ने अनेक जन सभाएं की हैं और इन जनसभाओं में उमड़ी भारी भीड़ का को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि भाजपा का लहर वापस आ चुका है। संगठन मंत्रियों के प्रवास और राष्ट्रीय नेताओं व मुख्यमंत्री की रैलियों से कार्यकर्ताओं में जोश की लहर है। यह लहर गांव-ढाणी तक पहुंचाने का काम भाजपा कार्यकर्ता बखूबी कर रहे हैं।
2. भाजपा सरकार के काम एवं कल्याणकारी योजनाएं : शुरुआती दौर में कांग्रेस जो बढ़त बनाए हुए थी वह भाजपा की रणनीति के कारण पूरी तरह से पिछड़ी हुई नजर आ रही है। राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा जनता को यह विश्वास दिलाने में सफल हो रही है कि जब भी बीजेपी को सत्ता में आने मौका मिला तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाया और खुद को भ्रष्टाचार से मुक्त रखा। इसके साथ ही भाजपा ने भामाशाह जैसी योजनाओं से राजस्थान को की जनता को अनेक तरह से मदद पहुंचाया है कि की आवास योजना सहित कई योजनाओं का लाभ सीधे आम आदमी को मिला है। यही मंत्र भाजपा के कार्यकर्ताओं को भी दिया गया है जिससे वे भाजपा को जिताने के लिए तन, मन से लगे हुए हैं ।
3. कांग्रेस की रैलियों से भीड़ गायब : गहलोत और पायलट कांग्रेस के लिए रैली भले ही रैलियां कर रहे हैं लेकिन इनकी सभाओं से जीत के लिए जरूर भीड़ गायब है। इसी मजबूरी के चलते उदयपुर में राहुल गांधी को अपना रोड शो निरस्त कर प्रबुद्ध जनों का सम्मेलन करना पड़ा था, जिसमें बेहद सीमित लोग आए थे। लोगों का कांग्रेस से इस तरह का मोहभंग कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है।
4. कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा न करना : कांग्रेस के पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं होना है। न केवल प्रदेश कांग्रेस में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, बल्कि आम जनता में भी कांग्रेस के मुख्यमंत्री को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
5. कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई : अशोक गहलोत और सचिन पायलट के खेमों में बंटी कांग्रेस में विरोध के स्वर टिकट वितरण के समय से ही मुखर हो रहे हैं। यही वजह है कि अपनी हर रैली में राहुल गांधी सचिन पायलट और अशोक गहलोत के एकता की बात करते हैं।
6. सिद्धू का आपत्तिजनक भाषण : पंजाब के कांग्रेस सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की सभाओं में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे और कई बार लगे। लेकिन एक बार भी नवजोत सिंह सिद्धू ने इसकी निंदा नहीं की। यह बात राजस्थान के लोगों में फैल चुकी है कि कांग्रेस पार्टी पाकिस्तान के प्रति नरम है और देश विरोधी ताकतों के प्रति भी नरम है। राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में इस बात को लेकर खासी नाराजगी है यही वजह है कि कुछ वोटर्स कांग्रेस को वोट नहीं देंगे।
इन सब वजहों से ऐसा लग रहा है जनता ‘राजस्थान के विकास’ पर भरोसा जताने के लिए तैयार है। यह संभव है कि भाजपा वापसी करे या फिर काँग्रेस को कड़ी टक्कर दे। राजस्थान की जनता ने मन बना लिया है।
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