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क्या है The End of India, इसके बारे में पाक पीएम ने भी की है चर्चा

आजकल चर्चाओं के बाजार में एक टॉपिक और जुड़ गया है और वो है The End of India जिसे गूगल पर काफी लोग सर्च कर रहे हैं। आप सोच रहे होंगे कि भला ये है क्या, तो आपको बता दें कि The End of India एक किताब है, जिसका एक अंश पूर्व क्रिकेटर और बीसीसीआई प्रमुख की बेटी सना गांगुली ने हाल ही में शेयर भी किया है। उन्होने भी उसी हिस्से को शेयर किया जिसे पाक पीएम इमरान खान ने भी शेयर किया था। अब आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर इसमें लिखा क्या है और किसके बारे में?

क्या है The End of India

खुशवंत सिंह की इस किताब के नाम से तो आप समझ ही गए होंगे कि ये भारत पर ही आधारित है। लेकिन इस किताब में कुछ ऐसा लिखा गया है जिसको लेकर काफी विवाद हो गया है, जिस अंश की बात हम ऊपर कर रहे थें वो ये है कि इसमें फासीवादी ताकतों के खिलाफ लिखा गया था शेयर किए गए अंश में लिखा गया था कि फासीवादी ताकतें हमेशा एक या दो कमजोर वर्ग को निशाना बनाती हैं। नफ़रत के आधार पर उपजा आंदोलन तभी तक चल सकता है जब तक भय और संघर्ष का माहौल बना रहे। इतना ही नहीं उन्होने इस अंश को पोस्ट करते समय यह भी लिखा कि आज हम में से जो लोग यह सोच कर ख़ुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं कि वो मुसलमान या ईसाई नहीं हैं, वो मूर्खों की दुनिया में जी रहे हैं।

हालांकि बाद में वह पोस्ट डिलीट कर दी गई थी। अब इसके बाद से ही सौरव गांगुली ने लोगों से अपनी बेटी को इन सबसे दूर रखने की अपील कर रहे हैं। सना अभी महज 18 साल की हैं और वो 12 वीं में पढ़ती हैं। उन्होंने ये नॉन फिक्शन फिक्शन किताब साल 2003 में लिखी थी। मृत्यु के पांच साल बाद कॉलमनिस्ट, जर्नलिस्ट और लेखक खुशवंत सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। अपनी किताब के अवलोकन में खुशवंत सिंह ने लिखा है कि मुझे लगा कि जैसे राष्ट्र खात्मे की ओर बढ़ रहा है। आधी सदी पहले देश बंटवारे की हिंसा का गवाह बना था। इतने दिनों में देश में बहुत कुछ बेहतर हो सकता था, लेकिन लग रहा है कि इससे और बुरा शायद अभी होना बाकी है।

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किताब में उन्होंने लिखा है कि पूरी तरह से संभावना है कि भारत भविष्य में पहले जैसा हो जाएगा। उनकी ये किताब बहुत चर्चा में रही। इतना ही नहीं इस किताब में लेखक खुशवंत सिंह ने 2002 में गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा के विश्लेषण से लेकर 1984 के सिख विरोधी दंगे, ग्राहम स्टेंस और उनके बच्चों को जलाना, पंजाब और कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा लक्षित हत्या के बारे में लिखा है। खुशवंत सिंह ने धर्म के पूर्ण भ्रष्टाचार के बारे में सोचने पर मजबूर किया है। खुशवंत सिंह कहते हैं कि इसी ने हमें हमें पृथ्वी पर सबसे क्रूर लोगों में शामिल किया है। इसके अलावा यह भी बताते हैं कि कट्टरवाद का राजनीति के साथ धर्म से कम लेना-देना है। उन्होंने किताब में सांप्रदायिक राजनीति पर भी लिखा है।

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