केदारनाथ घाटी में तबाही मचाने वाली झील में एक बार फिर से भर गया है पानी
केदारनाथ धाम में 2013 में आई आपदा जब जब भी याद आती है। तब तब वह भयानक खौफनाक मंजर याद आ जाता है। जिसमें हजारों लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी। केदारनाथ धाम में 2013 में आई आपदा इतनी भयावह थी कि इंसान क्या वहां पर मौजूद बड़ी-बड़ी इमारतें और होटल पूरी तरह से पानी में समा गए। कई हजार लोग गायब हो गए। बूढ़े, बच्चे, बुजुर्ग सब इस भयानक आपदा में बह गए। मगर फिर भी भोलेनाथ का केदारनाथ मंदिर उसी तरह सुरक्षित रखा रहा। इस तबाही का कारण थी केदारनाथ घाटी के ऊपर स्थित चेरावरी झील। जिसे गांधी सरोवर के भी नाम से जाना जाता है। एक बार फिर से यह दावा किया जा रहा है कि आपदा के बाद समतल हो चुकी इस तबाही मचाने वाली झील में एक बार फिर से पानी दिखाई देने लगा है ऐसे में केदारनाथ घाटी पर फिर से खतरा मंडरा रहा है।
झील में पानी दिखने का किया गया दावा
दरअसल केदारनाथ घाटी में अपनी स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले डॉक्टर्स ने यह दावा किया है कि तबाही मचाने वाली झील जिसे चेराबरी झील के नाम से जाना जाता है। वह एक बार फिर से पानी से भर गई है। इसके साथ ही जिला प्रशासन को इसकी सूचना दे दी गई है। देहरादून स्थित वादिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी को भी सतर्क कर दिया गया है। यह वही झील है जिसने 2013 में भयानक तबाही मचा कर हजारों लोगों की जान ले ली थी।

आपदा के बाद झील का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने कहा था कि बाढ़ के कारण या झील पूरी तरह समाप्त हो गई है। मगर एक बार फिर देश में पानी जमा होने के बाद वैज्ञानिकों ने एक बार फिर से इसके अध्ययन की योजना बनाई है। उन्होंने कहा है कि वह इसके अध्ययन के बाद ही कुछ कह पाएंगे। उनका कहना है कि यह कोई सामान्य झील ना होकर कोई ग्लेशियर झील भी हो सकती है। 2013 में आई तबाही का सबसे बड़ा कारण इसी झील का फटना माना जाता है। झील 250 मीटर लंबी और 150 मीटर तक चौड़ी है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



