संयुक्त राज्य अमेरिका डोनाल्ड ट्रंप और महाभियोग
दुनिया के सभी लोकतंत्र में सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति अगर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ना करने और पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने के दोषी पाए जाते हैं तो उनके ऊपर भी कार्यवाही करने का प्रावधान संबंधित देश के संविधान में किया गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान के अनुसार राष्ट्रपति देश और सरकार दोनों का प्रमुख है। ऐसी व्यवस्था के कारण राष्ट्रपति का पद और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके बाद भी यदि वह अपनी जिम्मेदारियों का सही तरह से निर्वह नहीं करता है और वह राजद्रोह, कदाचार, भ्रष्टाचार मे लिप्त पाया जाता है तो इतने शक्तिशाली पद पर बैठे रहने के बावजूद भी उस पर महाभियोग की प्रक्रिया रूपी लगाम लगाई जा सकती है।

अमेरिकी संसद की निचली सभा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। महाभियोग प्रस्ताव के पक्ष में 232 वोट पड़े जबकि विरोध में 196 वोट डाले गए। प्रतिनिधि सभा ( हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव) में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत प्राप्त है और इसी के नेतृत्व में महाभियोग जांच प्रक्रिया शुरू की गई है। ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने अपने विरोधी पार्टी के जांच के लिए यूक्रेन पर दबाव बनाया था। महाभियोग प्रस्ताव पारित होने के बाद अब राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ सार्वजनिक रूप से जांच होगी। इस प्रस्ताव में यह भी बता दिया गया कि राष्ट्रपति ट्रंप के वकीलों के पास कौन-कौन से अधिकार मौजूद होंगे।
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संयुक्त राज्य अमेरिका में महाभियोग की प्रक्रिया
महाभियोग प्रक्रिया के तहत प्रतिनिधि सभा की 6 समितियां मामले की जांच करेंगी। मामला ज्यादा गंभीर होने की स्थिति में न्यायिक समिति के पास भेजा जाएगा। यदि जांच के बाद ट्रंप के खिलाफ सबूत नहीं मिले तो वह अपने पद पर बने रहेंगे। और यदि सबूत मिल गए तो प्रतिनिधि सभा महाभियोग प्रक्रिया की विभिन्न धाराएं संसद में वोटिंग कराएगी। महाभियोग के पक्ष में ज्यादा वोट आए तो प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर सीनेट के पास भेज दिया जाएगा। जहां धाराओं पर अलग-अलग सुनवाई होगी। इसके बाद से सीनेट में ट्रायल पर पुनः वोटिंग कराई जाएगी। दो तिहाई से कम वोट पड़ने पर ट्रंप अपने पद पर बने रहेंगे।

